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पलामू को उप-राजधानी बनाने की मांग ने पकड़ा जोर: BJP नेता अरविंद तिवारी की मुहिम को मिला विधायक जयराम महतो का साथ!

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सीएम हेमंत सोरेन पर वादाखिलाफी का आरोप: 2019 और 2024 में सत्ता मिलने के बावजूद भूला उप-राजधानी बनाने का वादा, अब सदन से लेकर सड़क तक गूंजेगा मुद्दा

📍 पलामू/रांची | न्यूज स्केल लाइव

झारखंड की सियासत में पलामू को उप-राजधानी (Sub-Capital) बनाने का मुद्दा एक बार फिर से पूरी तरह गरमा गया है। भौगोलिक और रणनीतिक रूप से बेहद अहम इस क्षेत्र को उसका वाजिब हक दिलाने के लिए अब राजनीतिक लामबंदी शुरू हो गई है। पलामू के रहने वाले भाजपा के मुखर युवा नेता अरविंद कुमार तिवारी की इस पुरानी मुहिम को अब डुमरी के तेजतर्रार विधायक जयराम महतो का भी पुरजोर समर्थन मिल गया है।

हेमंत सोरेन पर ‘वादाखिलाफी’ का सीधा आरोप भाजपा नेता अरविंद कुमार तिवारी ने इस मांग को लेकर पूर्व में भी सरकार और भाजपा के शीर्ष नेताओं को पत्र लिखकर कड़ा आग्रह किया था। श्री तिवारी ने सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए याद दिलाया कि सीएम ने अपने पलामू दौरे के क्रम में जनता से स्पष्ट वादा किया था कि 2019 में सत्ता में आने पर पलामू को उप-राजधानी बनाया जाएगा। लेकिन 2019 के बाद अब 2024 में भी हेमंत सोरेन सत्ता पर काबिज हैं, इसके बावजूद पलामू की इस जायज मांग पर विचार तक नहीं किया गया। अन्य राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे पर सिर्फ चुप्पी ही साधी है।

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विधायक जयराम महतो के समर्थन से मिली नई धार लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ी इस मांग को अब डुमरी विधायक जयराम महतो के साथ से नई ताकत और ऊर्जा मिल गई है। जयराम महतो ने इस मांग का पुरजोर समर्थन करते हुए साफ कहा है कि प्रशासनिक और विकास के दृष्टिकोण से पलामू को उप-राजधानी का दर्जा मिलना ही चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि वे इस ज्वलंत मुद्दे पर सीधे सरकार से बात करेंगे। जयराम महतो के इस समर्थन से यह मुद्दा राजनीतिक गलियारों में हॉट टॉपिक बन गया है।

आखिर क्यों जरूरी है पलामू को उप-राजधानी बनाना? झारखंड के पश्चिमी भाग में स्थित पलामू अपना एक विशेष भौगोलिक और रणनीतिक महत्व रखता है। लंबे समय से यह तर्क दिया जा रहा है कि प्रशासनिक सुविधाओं की पहुंच आसान करने और इस पूरे प्रमंडल के समुचित विकास के लिए इसे उप-राजधानी बनाया जाना तकनीकी और व्यावहारिक रूप से बेहद उपयुक्त है। अब अरविंद तिवारी और जयराम महतो जैसे नेताओं के मुखर होने से यह तय माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मांग एक बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है।

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