लोहरदगा। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) चीरी, लोहरदगा में जिले के उच्च प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के विज्ञान शिक्षकों तथा बी.एड. और डी.एल.एड. के प्रशिक्षु छात्राध्यापकों के लिए एक दिवसीय गैर-आवासीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विज्ञान प्रदर्शनी के प्रभावी आयोजन और प्रदर्श निर्माण की प्रक्रिया से शिक्षकों एवं प्रशिक्षुओं को अवगत कराना था। यह कार्यक्रम डायट प्राचार्य सह जिला शिक्षा अधीक्षक लोहरदगा अभिजीत कुमार के मार्गदर्शन में झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) की वार्षिक कार्ययोजना के अनुरूप आयोजित किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य जिले के उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में विज्ञान प्रदर्शनी के आयोजन को प्रभावी और व्यवस्थित रूप देना था।
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रभारी प्राचार्य अमृता सिन्हा, डायट के संकाय सदस्यों और रिसोर्स पर्सन द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर प्रभारी प्राचार्य अमृता सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विज्ञान शिक्षण को केवल सैद्धांतिक न रखकर प्रायोगिक कक्षाओं से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने और स्थानीय संसाधनों का अधिकतम उपयोग करते हुए कम खर्च में प्रभावी विज्ञान प्रदर्श तैयार करने पर जोर दिया। कार्यशाला के दौरान आगामी 17 मार्च को डायट चीरी में आयोजित होने वाली जिला स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी की तैयारियों पर भी चर्चा की गई। रिसोर्स शिक्षक अंकेश कुमार मेहता ने प्रतिभागियों को विज्ञान प्रदर्श निर्माण की विभिन्न बारीकियों और तकनीकों की जानकारी दी।
प्रतिभागियों को दो समूहों में विभाजित कर गणित और विज्ञान विषयों से संबंधित प्रदर्श निर्माण के लिए विषयवार उन्मुखीकरण कराया गया। साथ ही उन्हें प्रदर्श के मूल्यांकन की प्रक्रिया और मानकों के बारे में भी जानकारी दी गई। कार्यशाला में प्रदर्श की उपयोगिता, सृजनात्मकता और नवाचार जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। इसके अलावा प्रतिभागियों को राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर आयोजित होने वाली विभिन्न विज्ञान प्रदर्शनी के स्वरूप और उनके महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई।























Total Users : 837056
Total views : 2548812