मयूरहंड (चतरा)। सैनिक अपने प्राण गवांकर देश बड़ा कर जाते हैं, बलिदानों की बुनियाद पर राष्ट्र खड़ा कर जाते हैं” कवि हरिओम पवार की ये पंक्तियां मयूरहंड प्रखंड के वीर सपूत शहीद शक्ति सिंह पर सटीक बैठती हैं। प्रखंड के अंबातरी गांव निवासी अधिवक्ता संत कुमार सिंह के पुत्र शक्ति सिंह 17 अगस्त 2016 को जम्मू-कश्मीर के बारामूला में आतंकवादियों से मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त हुए थे। उनकी स्मृति में हर वर्ष 17 अगस्त को शहीद स्मारक पर शहादत दिवस मनाया जाता है, जहां परिजन, प्रखंडवासी और जनप्रतिनिधि श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं। शहीद की स्मृति को चिरस्थायी स्वरूप देने और युवाओं में देशभक्ति की प्रेरणा जगाने के उद्देश्य से 17 अगस्त 2023 को सिमरिया के तत्कालीन विधायक किशुन कुमार दास ने अपने विधायक निधि से 6.5 लाख की लागत से शहीद के नाम पर पार्क निर्माण की आधारशिला रखी थी। जिला परिषद द्वारा कार्य आरंभ भी किया गया, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण निर्माण कार्य अब ठप पड़ गया है। स्थिति यह है कि अधूरी दीवारें गिरने लगी हैं और जहां फूलों की क्यारियां होनी थीं, वह स्थल कूड़े-करकट का अड्डा बन चुका है। हर वर्ष गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर शहीद स्मारक पर प्रखंड प्रशासन द्वारा ध्वजारोहण तो होता है, लेकिन अधूरे पार्क निर्माण पर किसी का ध्यान नहीं जाता। विभाग गहरी नींद में है, जनप्रतिनिधियों की चुप्पी खलती है और परिजन खुद को लाचार महसूस कर रहे हैं। शहीद परिवार के सम्मान से जुड़ा एक और गंभीर मुद्दा भूमि आवंटन का है। सरकारी प्रावधान के अनुसार शहीद के परिजनों को 5 एकड़ कृषि योग्य भूमि और 12.5 डिसमिल आवासीय भूमि दिए जाने का नियम है। शहीद के पिता संत कुमार सिंह के अनुसार, मयूरहंड अंचल द्वारा मौजा बांसडीह (थाना मयूरहंड) के खाता संख्या-20, प्लॉट संख्या-70 में मात्र 2 एकड़ भूमि का बंदोबस्त कर कागजात सौंपे गए। इस बंदोबस्ती की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों के विरोध के कारण आज तक न तो सीमांकन हुआ और न ही जमीन सौंपी गई। उन्होंने बताया कि बांसडीह उनके घर से काफी दूर है और वहां खेती करना जोखिम भरा है। इस कारण उन्होंने उपायुक्त, चतरा से अपने गांव या आसपास कृषि योग्य भूमि तथा चतरा में आवासीय भूखंड उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है, लेकिन अब तक नियमानुसार भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई। संत कुमार सिंह ने रोष और दुख प्रकट करते हुए कहा कि जिला और प्रखंड प्रशासन द्वारा शहीद का सम्मान नहीं, बल्कि अपमान किया जा रहा है। उन्होंने यह भी दुख जताया कि इस वर्ष 17 अगस्त को शहीद स्मारक पर झारखंड सरकार का कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ। अंत में उन्होंने जगदंबा प्रसाद मिश्र की पंक्तियां उद्धृत करते हुए कहा “शहीदों के चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशान होगा।” उनका कहना है कि ये पंक्तियां बलिदान को अमर मानती हैं, लेकिन अफसोस कि उनके शहीद पुत्र की शहादत को प्रशासनिक उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है।
शहीद शक्ति सिंह की शहादत पर लगा उपेक्षा का ग्रह, अधूरा पार्क और अधूरी जमीन से परिजन आहत

On: February 5, 2026 11:14 PM

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