Chatra/Kunda: चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट बेखबरः खुले आसमान में रहने को विवश पांच अनाथ नबालिग, फरिश्ते का है इंतजार, घर बनाने के लिए कर रहे जद्दोजहद

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चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट बेखबरः

खुले आसमान में रहने को विवश पांच अनाथ नबालिग, फरिश्ते का है इंतजार, घर बनाने के लिए कर रहे जद्दोजहद

अजित कुमार यादव की रिपोर्ट

कुंदा(चतरा)ः सरकारी उदासीनता के कारण चतरा जिले के अति उग्रवाद प्रभावित कुंदा प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत बौधाड़ीह पंचायत के हारूल (चितवातरी) गांव में पांच अनाथ भाई खुले आसमान में रहने को विवश हैं। सबसे बड़ी विडंबना यह है की पांचों भाई नाबालिग हैं, इसके बाबजूद इनके पूर्नवास के लिए कोई पहल संबंधित विभाग के द्वारा नही की गई है। मिली जानकारी के अनुसार लगभग एक वर्ष पूर्व बच्चों की मा मनिया देवी का निधन हो गया है। जबकी माता के निधन के 3 वर्ष पूर्व पिता बल्ली गंझू की मौत हो चुकी है। सबसे बड़ा भाई सरोज कुमार बताता है की किसी तरह से मेहनत मजदूरी कर अपने व भाइयों के लिए भोजन का प्रबंध करता हूं। ऐसे हालात में घर बनाना हमारे बस से बाहर की बात है। हलांकी फिर भी सरोज अपने चारों भाइयों को छत देने के लिए जद्दोजहद कर मिट्टी का दीवाल खड़ा कर रहा है। यदि इन अनाथ बच्चों को किसी भी तरह का सरकारी स्तर पर आवास देने का प्रबंध किया जाता तो शायद इन्हें भी छत के नीचे सुकून की नींद मिल पाती। सामाजिक स्तर पर भी कोई फरिश्ते का सहारा मिल जाता तो थोड़ी सहूलियत मिल जाती। लेकिन फिलहाल पांचों अनाथ भाई खुले आसमान में रहने को विवश हैं। वही संबंधित पंचायत क्षेत्र के पंचायत सेवक राजु रंजन का कहना है की अनाथ बच्चों के पिता का नाम प्रधानमंत्री आवास एसीसी डाटा में है परंतु सरकारी नियमानुसार 18 वर्ष के बाद ही किसी सदस्य के नाम से प्रधानमंत्री आवास का स्वीकृति दिया जा सकता है। जबकी अनाथ भाई में सबसे बड़ा भाई सरोज का उम्र भी 18 वर्ष से कम है। दुसरी ओर अनाथ व बेसहारा बच्चों के लिए बाल संरक्षण ईकाई (चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट) का गठन किया गया है और ऐसे बच्चों के पुनर्वास के साथ बेहतरी के लिए जवाबदेही भी किशोर न्याय अधिनियम के तहत तय की गई है। पर लंबे समय से बच्चों के पुनर्वास के लिए कोई कार्य नही किये जाना विभाग के कार्य पर ही प्रश्न खड़े करता है।

रिपोर्ट अजित कुमार यादव की

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