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सहायक आचार्य परीक्षा का संशोधित परिणाम रद्द, चार सप्ताह में नया रिजल्ट जारी करने का आदेश

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सुप्रीम कोर्ट के फैसले से 11 हजार से अधिक नियुक्त सहायक आचार्यों पर असर की संभावना, अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को

रांची। झारखंड प्रारंभिक विद्यालय प्रशिक्षित सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023 के संशोधित परिणाम को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। न्यायमूर्ति उज्जवल भुईंया और न्यायमूर्ति एएस चंदूरकर की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) द्वारा जारी संशोधित परिणाम को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने संबंधित विभागीय निर्देशों के अनुरूप चार सप्ताह के भीतर नया परिणाम जारी करने का निर्देश दिया है। साथ ही झारखंड के मुख्य सचिव को आदेश के अनुपालन से संबंधित रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।

क्या है पूरा मामला

सहायक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023 का आयोजन 26,001 पदों पर नियुक्ति के लिए किया गया था। इसमें कक्षा एक से पांच और कक्षा छह से आठ के लिए शिक्षकों का चयन किया जाना था। परीक्षा के बाद परिणाम जारी किया गया। इसके बाद स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के निर्देश पर जेएसएससी ने परिणाम में संशोधन किया।

विभाग की ओर से जारी निर्देश में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को अनारक्षित श्रेणी में शामिल किए जाने से संबंधित पात्रता एवं अंकों के प्रावधानों का उल्लेख किया गया था। इसी आधार पर जेएसएससी ने परिणाम में बदलाव करते हुए संशोधित सूची जारी की।

संशोधित परिणाम के आधार पर 11 हजार से अधिक अभ्यर्थियों के नाम नियुक्ति के लिए अनुशंसित किए गए और राज्य के विभिन्न जिलों में उनकी नियुक्ति भी हुई। जिला स्तर पर सहायक आचार्यों की नियुक्ति और काउंसलिंग संबंधी सरकारी सूचनाएं भी जारी की गई थीं।

अवमानना याचिका से शुरू हुआ विवाद

संशोधित परिणाम को लेकर कुछ अभ्यर्थियों ने न्यायालय का रुख किया। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जेएसएससी का संशोधित परिणाम सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के आदेशों के अनुरूप नहीं है। इसी विवाद से संबंधित अवमानना याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।

एक अन्य मामले में अभ्यर्थियों ने दावा किया है कि मेरिट तैयार करने के दौरान आरक्षित श्रेणी के अधिक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को अनारक्षित श्रेणी में समायोजित किए जाने संबंधी न्यायालय के निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं हुआ। मई 2026 के एक आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने मेरिट सूची और न्यूनतम अर्हता से जुड़े प्रावधानों की व्याख्या भी की थी।

अब नए सिरे से परिणाम तैयार होगा

सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद जेएसएससी को संशोधित परिणाम के स्थान पर नया परिणाम तैयार कर जारी करना होगा। इससे पहले जारी परिणाम के आधार पर हुई नियुक्तियों की स्थिति पर भी इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, कितने शिक्षकों की नियुक्ति प्रभावित होगी या किन अभ्यर्थियों की स्थिति बदलेगी, यह नए परिणाम के प्रकाशन के बाद ही स्पष्ट होगा

संशोधित परिणाम को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में भी कई याचिकाएं लंबित हैं। वहीं, नॉर्मलाइजेशन से संबंधित अवमानना याचिका की सुनवाई अलग से की जाएगी। इस मामले में अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित है।

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