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मजदूरी के दौरान करंट लगने से चतरा के मजदूर की मौत

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पत्नी की पहले ही हो चुकी है मौत, अब अनिल भारती के निधन से दो नाबालिग बेटियों के सिर से उठा माता-पिता का साया; परिवार पर गहराया आर्थिक संकट

हंटरगंज (चतरा), संवाददाता। रोजी-रोटी की तलाश में भोपाल गए चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड अंतर्गत डुमरी खुर्द गांव निवासी 47 वर्षीय अनिल भारती की मजदूरी के दौरान करंट लगने से मौत हो गई। बुधवार दोपहर करीब 12 बजे शव गांव पहुंचते ही परिजनों में कोहराम मच गया। अनिल की पत्नी की करीब तीन वर्ष पहले ही मौत हो चुकी है। अब अनिल की मौत के बाद उनकी दो नाबालिग बेटियों के सिर से माता-पिता दोनों का साया उठ गया है।

परिजनों के अनुसार, स्वर्गीय रत्न भुईयां के पुत्र अनिल भारती करीब छह माह पहले मजदूरी करने भोपाल गए थे। वह वहां एक फैक्ट्री में काम करते थे। बताया गया कि करीब तीन दिन पहले काम से लौटकर कमरे में पहुंचे थे। इसी दौरान हीटर में करंट प्रवाहित होने से वह उसकी चपेट में आ गए। साथियों ने उन्हें तत्काल निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।

कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद बुधवार दोपहर एंबुलेंस से शव डुमरी खुर्द लाया गया। शव पहुंचते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। परिजन शव देखकर रोने-बिलखने लगे। करीब चार घंटे तक शव एंबुलेंस में ही रखा रहा। सूचना मिलने पर हंटरगंज थाना प्रभारी संदीप कुमार पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे और परिजनों को समझाया। इसके बाद शव को एंबुलेंस से उतारा गया।

पांच बेटियों और एक बेटे का था परिवार

अनिल भारती के परिवार में पांच बेटियां और एक बेटा है। तीन बेटियों की शादी हो चुकी है, जबकि दो बेटियां अभी नाबालिग हैं। पत्नी की मौत के बाद अनिल ही परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहे थे और मजदूरी कर घर का खर्च चला रहे थे। उनके निधन के बाद परिवार के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

ग्रामीणों ने मुआवजे और रोजगार की मांग की

घटना के बाद ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और श्रम विभाग से मृतक के आश्रित परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने तथा सरकारी प्रावधान के तहत उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में मजदूरों को रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है। ग्रामीणों ने सरकार से स्थानीय स्तर पर रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि लोगों को मजबूरी में पलायन कर दूसरे राज्यों में मजदूरी करने न जाना पड़े।

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