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रेलवे कॉलोनी में पेड़ के नीचे मिली दो सप्ताह की नवजात बच्ची

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समय रहते बची मासूम की जान, पालोना जैसी पहलें सुरक्षित विकल्प की ओर करती हैं जागरूक

रांची, संवाददाता। झारखंड की राजधानी रांची में रेलवे ऑफिसर्स कॉलोनी के समीप गुरुवार की सुबह पेड़ के नीचे करीब दो सप्ताह की एक प्रीमैच्योर नवजात बच्ची लावारिस हालत में मिली। सुबह टहलने निकले एक व्यक्ति की नजर बच्ची पर पड़ी, जिसके बाद तत्काल इसकी सूचना दी गई। समय रहते बच्ची को वहां से सुरक्षित निकाल लिया गया। बताया गया कि आसपास आवारा कुत्ते भी मौजूद थे, जिससे बच्ची की जान को गंभीर खतरा हो सकता था।

सूचना मिलने के बाद रेलवे पुलिस मौके पर पहुंची और नवजात को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों के अनुसार बच्ची की हालत फिलहाल स्थिर है। बच्ची का वजन करीब 1.1 किलोग्राम बताया गया है और वह काफी कमजोर व समय से पहले जन्मी हुई है। उपचार के बाद उसके स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

घटना ने एक बार फिर नवजात बच्चों के सुरक्षित संरक्षण और परित्याग की समस्या को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आखिर उस मासूम की क्या गलती थी, जिसे इतनी छोटी उम्र में असुरक्षित हालत में अकेला छोड़ दिया गया?

ऐसे मामलों में पालोना (PaaLoNaa) जैसी पहलें महत्वपूर्ण हो जाती हैं। रांची की मोनिका गुंजन आर्या द्वारा शुरू की गई पालोना संस्था नवजात शिशुओं के परित्याग और शिशु हत्या की रोकथाम तथा जागरूकता के लिए काम करती है। संस्था सुरक्षित विकल्प और नवजात संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने की दिशा में सक्रिय रही है।

समाज में यदि किसी कारण से कोई मां या परिवार नवजात बच्चे की देखभाल करने में सक्षम नहीं है, तो बच्चे को झाड़ियों, रेलवे लाइन, सड़क किनारे या किसी अन्य असुरक्षित स्थान पर छोड़ना समाधान नहीं है। ऐसे मामलों में उपलब्ध बाल संरक्षण व्यवस्था, अधिकृत संस्थाओं और प्रशासन से संपर्क करना ही सुरक्षित रास्ता है। मिशन वात्सल्य के दिशा-निर्देशों में भी परित्यक्त बच्चों के लिए पालना शिशु प्राप्ति केंद्र जैसी व्यवस्था का प्रावधान किया गया है।

रांची की यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि समाज के सामने मानवता और जिम्मेदारी का सवाल भी है। जरूरत है कि नवजात बच्चों को असुरक्षित तरीके से छोड़ने के बजाय सुरक्षित संरक्षण और सहायता की व्यवस्था के बारे में व्यापक जागरूकता पैदा की जाए।

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