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गुमला-: उपायुक्त दिलेश्वर महतो
की अध्यक्षता में आज समाहरणालय सभागार में कृषि, मत्स्य, उद्यान, पशुपालन, सहकारिता एवं भूमि संरक्षण विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में संबंधित विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति एवं गांव स्तर पर किए जा रहे कार्यों की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, विभागीय समन्वय तथा पात्र लाभुकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।
की अध्यक्षता में आज समाहरणालय सभागार में कृषि, मत्स्य, उद्यान, पशुपालन, सहकारिता एवं भूमि संरक्षण विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में संबंधित विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति एवं गांव स्तर पर किए जा रहे कार्यों की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, विभागीय समन्वय तथा पात्र लाभुकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।बैठक के दौरान प्रॉस्पर परियोजना की भी विशेष रूप से समीक्षा की गई। उपायुक्त ने परियोजना के तहत चयनित 100 गांवों में प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन एवं आजीविका संवर्धन से संबंधित कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने संबंधित विभागों एवं सहयोगी संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए गांव स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
कृषि विभाग की समीक्षा के दौरान वर्षापात, आच्छादन, बिरसा बीज विनिमय-वितरण योजना, बिरसा फसल विस्तार योजना, झारखंड ऋण माफी योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, किसान समृद्धि योजना, आत्मा तथा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन सहित अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराने, वैकल्पिक खेती को बढ़ावा देने तथा कृषि योजनाओं की जानकारी अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने का निर्देश दिया।
उद्यान विभाग के अंतर्गत बागवान एवं उद्यान मित्रों तथा कृषकों का प्रशिक्षण, माली प्रशिक्षण, मिर्च, प्याज, अदरक एवं हल्दी की खेती, जैविक एवं सब्जी उत्पादन, फूलों की खेती, संरक्षित फूलों की खेती, पपीता की खेती, पॉली हाउस, सब्जी पौधशाला, मशरूम उत्पादन, उद्यानिकी क्षेत्र में तकनीकी खेती तथा उन्नत पौध सामग्री से संबंधित गतिविधियों की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैकल्पिक एवं लाभकारी फसलों के लिए प्रोत्साहित करने तथा प्रशिक्षण के माध्यम से उनकी क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया।
बैठक में राष्ट्रीय बांस मिशन के अंतर्गत सरकारी एवं निजी क्षेत्र में बांस रोपण, बांस आधारित गतिविधियों तथा प्रशिक्षण एवं जागरूकता से संबंधित कार्यों की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ ग्रामीणों के लिए अतिरिक्त आजीविका के अवसर विकसित करने पर बल दिया।
मत्स्य विभाग की समीक्षा के दौरान सभी स्रोतों से मत्स्य उत्पादन, जलाशयों एवं तालाबों में मत्स्य पालन, निजी तालाबों में मत्स्य पालन, पिंजरा आधारित मत्स्य पालन, बायोफ्लॉक आधारित मत्स्य पालन, मत्स्य बीज वितरण, मत्स्य बीज उत्पादकों को प्रोत्साहन, मत्स्य बीज के लिए स्पॉन की आपूर्ति, मत्स्य बीज उत्पादन, जलाशय एवं नदियों में मत्स्य बीज संचयन, मत्स्य अंगुलिकाओं का संचयन, मत्स्य पालन के लिए आवश्यक सामग्री एवं उपकरण, मत्स्य किसान समूहों एवं समितियों से संबंधित गतिविधियों की समीक्षा की गई।
इसके अलावा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, तालाब एवं जलाशय मत्स्य विकास तथा आजीविका आधारित मत्स्य पालन से जुड़ी योजनाओं की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने जलस्रोतों का बेहतर उपयोग करते हुए अधिक से अधिक जलाशयों एवं तालाबों को आजीविका एवं कृषि गतिविधियों से जोड़ने के निर्देश दिए।
उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जिन गांवों में जलाशय, रिजर्वायर, नहर अथवा अन्य सिंचाई संरचनाएं उपलब्ध हैं, उनके पानी का उपयोग कृषि कार्यों में सुनिश्चित करने की दिशा में कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि जिस जलस्रोत से किसानों को सिंचाई की सुविधा दी जा सकती है, उससे संबंधित गांव को सिंचाई सुविधा से आच्छादित करने की ठोस योजना तैयार कर उसका क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जिन जलाशयों, रिजर्वायर अथवा नहरों की स्थिति खराब है या जो बंद पड़े हैं, उनका स्थल निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मती एवं पुनर्बहाली की कार्ययोजना तैयार की जाए। मरम्मत के बाद किसानों तक पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें।
बैठक में जीआईएस आधारित आदर्श योजना निर्माण, जलनिधि, केएसवाई, पीडीएमसी, भूमि सुधार, एमआईडीएच सहित विभिन्न योजनाओं में विभागीय समन्वय पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही वीबी-जी रैम-जी प्रशिक्षण, अनुबंध को दो वर्ष तक विस्तारित करने तथा आगामी तीन माह के लिए कार्ययोजना तैयार कर निर्धारित समय-सीमा के अनुसार कार्यों को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
प्रॉस्पर परियोजना के अंतर्गत गांव स्तर पर किए जा रहे कार्यों, विभिन्न विभागों से प्राप्त सहयोग तथा प्रशिक्षण गतिविधियों की जानकारी साझा की गई। विभागीय प्रतिवेदनों के माध्यम से कृषि, उद्यान, बांस मिशन एवं मत्स्य क्षेत्र में संचालित योजनाओं एवं गतिविधियों की भी समीक्षा की गई।
उपायुक्त ने किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड के लाभों की जानकारी देने एवं पात्र किसानों को इससे जोड़ने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया। उन्होंने बीज वितरण, वैकल्पिक खेती, सिंचाई सुविधा एवं प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग को ग्रामीण आजीविका से जोड़ते हुए योजनाओं के धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देने को कहा।
बैठक में उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन, जिला उद्यान पदाधिकारी, जिला भूमि संरक्षण पदाधिकारी, जिला कृषि पदाधिकारी, जिला सहकारिता पदाधिकारी, मत्स्य विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मी, प्रदान संस्था, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन, डब्ल्यूओटीआर एवं विकास भारती सहित अन्य संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।
















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