भवन का दरवाजा गायब, जर्जर छत और पेयजल-शौचालय का अभाव; आवारा पशुओं और विषैले कीड़े-मकोड़ों के साये में पढ़ने को मजबूर नौनिहाल
न्यूज स्केल लाइव ब्यूरो
देवघर। सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के बेहतर पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक बाल शिक्षा के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाने के बड़े-बड़े दावों की जमीनी हकीकत देखनी हो, तो देवीपुर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत तिलजोरी आंगनबाड़ी केंद्र को देखा जा सकता है। यह आंगनबाड़ी केंद्र इस समय अपनी बदहाल स्थिति और विभागीय उपेक्षा के कारण स्थानीय ग्रामीणों के बीच गहरी चिंता और चर्चा का विषय बना हुआ है।
विदित हो कि इस आंगनबाड़ी केंद्र के भवन का निर्माण कई वर्षों पूर्व कराया गया था, लेकिन समय पर रख-रखाव और मरम्मत न होने के कारण अब पूरा परिसर पूरी तरह जर्जर हो चुका है। वर्तमान में भवन का मुख्य दरवाजा पूरी तरह से टूटकर गायब हो चुका है, जिससे मासूम बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे है।
टूटे दरवाजे से घुस रहे आवारा पशु और सांप-बिच्छू, बरसात में बढ़ी आफत
स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों के अनुसार, केंद्र का मुख्य दरवाजा टूटा होने के कारण परिसर असामाजिक तत्वों और आवारा पशुओं का अड्डा बन चुका है। इसके अलावा, झाड़ियों के समीप होने के कारण हमेशा विषैले कीड़े-मकोड़े और सांप-बिच्छू के अंदर घुसने का खतरा बना रहता है, जिससे यहाँ आने वाले 3 से 6 वर्ष के छोटे-छोटे मासूम बच्चों की जान पर हर पल खतरा मंडराता रहता है।
मानसून की शुरुआत के साथ ही इस केंद्र की स्थिति और भी भयावह एवं दयनीय हो गई है। जर्जर छत से पानी टपकने और चारों तरफ जलजमाव होने के कारण बच्चों की पढ़ाई, खेलकूद और अन्य जरूरी गतिविधियां पूरी तरह से ठप हो गई हैं।
न बाथरूम की सुविधा और न पीने का साफ पानी; अधिकारी साधे हैं मौन
तिलजोरी के ग्रामीणों का कहना है कि डिजिटल इंडिया और बाल विकास के नारों के बीच इस केंद्र में बुनियादी सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हैं। केंद्र परिसर में न तो बच्चों के लिए चालू हालत में शौचालय (बाथरूम) की व्यवस्था है और न ही शुद्ध पेयजल की कोई मुकम्मल व्यवस्था है। चापाकल खराब होने के कारण सेविका-सहायिका और बच्चों को पानी के लिए दूर जाना पड़ता है।
यह पूरी स्थिति महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) के स्थानीय अधिकारियों की उदासीनता और लापरवाही की जीती-जागती कहानी बयां कर रही है। इस बदहाली को लेकर जब ‘न्यूज स्केल लाइव’ की टीम द्वारा संबंधित प्रखंड और जिला स्तरीय अधिकारियों से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो हमेशा की तरह अधिकारियों से संपर्क नहीं हो सका, जिससे प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
तिलजोरी आंगनबाड़ी केंद्र बदहाली: एक नजर में
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│ मुख्य प्रभावित केंद्र │ तिलजोरी आंगनबाड़ी केंद्र, देवीपुर प्रखंड (देवघर)│
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│ वर्तमान भौतिक स्थिति │ मुख्य दरवाजा टूटा, जर्जर छत से पानी का रिसाव │
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│ मुख्य बुनियादी समस्याएं │ शौचालय का अभाव, पेयजल संकट व बाउंड्री न होना │
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│ बच्चों पर मंडराता खतरा │ आवारा पशु, सांप-बिच्छू और मौसमी बीमारियां │
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│ जनता की मुख्य मांग │ अविलंब प्रशासनिक जांच और भवन का जीर्णोद्धार│
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सुरक्षित वातावरण में पढ़ने के लिए ग्रामीणों ने खोला मोर्चा
तिलजोरी गांव के प्रबुद्ध नागरिकों और आक्रोशित अभिभावकों ने सामूहिक रूप से देवघर उपायुक्त और बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) से मांग की है कि इस केंद्र की सुधि ली जाए। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक भवन की मरम्मत नहीं होती, दरवाजा नहीं लगाया जाता और बुनियादी सुविधाएं बहाल नहीं की जातीं, तब तक बच्चों को केंद्र भेजना किसी खतरे से खाली नहीं है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस जर्जर भवन का कायाकल्प नहीं किया गया, तो वे प्रखंड मुख्यालय के समक्ष धरना देने को बाध्य होंगे।

























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