स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी उठे सवाल, एंबुलेंस सेवा नहीं मिलने से कर्ज लेकर बचानी पड़ी थी एक ग्रामीण की जान
कुंदा (चतरा)। कुंदा थाना क्षेत्र के बौधाडीह पंचायत अंतर्गत बेसरा गांव में अंधविश्वास के कारण एक 13 वर्षीय बालक की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान महाबली भारती (13), पिता महेंद्र भारती, के रूप में हुई है। घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में फैली अंधविश्वास की सोच और स्वास्थ्य सुविधाओं की चुनौतियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, सोमवार को महाबली को जहरीले सांप ने काट लिया था। परिजन उसे तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक और पारंपरिक उपचार में जुट गए। समय पर चिकित्सकीय इलाज नहीं मिलने के कारण बच्चे की हालत बिगड़ती गई और उसकी मौत हो गई।
ग्रामीणों के अनुसार, मौत के बाद भी परिजन पोस्टमार्टम कराने को तैयार नहीं हुए। उन्हें यह भ्रम था कि पोस्टमार्टम के दौरान शव के अंग निकाल लिए जाते हैं। इसी आशंका के कारण परिवार के लोग यह कहने लगे कि बच्चे को सांप ने काटा ही नहीं था। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चे की मौत सर्पदंश के कारण हुई है।
ग्रामीण इलाकों में आज भी कई लोग सांप काटने जैसी गंभीर स्थिति में अस्पताल जाने के बजाय ओझा-गुनी और झाड़-फूंक का सहारा लेते हैं, जो कई बार जानलेवा साबित होता है। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद ऐसी घटनाएं सामने आना चिंता का विषय है।
इधर, मेदवाडीह गांव की एक महिला ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। महिला ने बताया कि कुछ दिन पूर्व उसके पति को भी सांप ने काट लिया था। सरकारी एंबुलेंस सेवा के लिए 108 नंबर पर घंटों संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन सहायता नहीं मिल सकी। अंततः कर्ज लेकर निजी वाहन से रात में डॉक्टर के पास पहुंचाया गया, जिसके बाद उनके पति की जान बच सकी। अब परिवार कर्ज और उसके ब्याज का बोझ झेल रहा है।
कुंदा प्रखंड प्रमुख प्रतिनिधि जयराम भारती ने घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि क्षेत्र की बड़ी आबादी के अनुपात में स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त चिकित्सकों की उपलब्धता नहीं है। आपातकालीन परिस्थितियों में समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने से लोग मजबूरी में अंधविश्वास की ओर रुख कर लेते हैं। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने तथा जागरूकता अभियान को और प्रभावी बनाने की मांग की है।
यह घटना न केवल अंधविश्वास के दुष्परिणामों को उजागर करती है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता की ओर भी संकेत करती है।




















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