एसीबी के विशेष न्यायाधीश की अदालत ने सुनाया फैसला; एक साल की सश्रम जेल और 15 हजार रुपये का लगा आर्थिक जुर्माना; म्यूटेशन के नाम पर मांगी थी रिश्वत
न्यूज स्केल लाइव
रांची/खूंटी: झारखंड में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के खिलाफ अदालती कार्रवाई का एक बड़ा और नजीर पेश करने वाला फैसला सामने आया है। एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) के विशेष न्यायाधीश ओंकार नाथ चौधरी की प्रतिष्ठित अदालत ने खूंटी अंचल कार्यालय के तत्कालीन राजस्व कर्मचारी सत्यनारायण राम को मात्र 500 रुपये की रिश्वत लेने के दो दशक पुराने मामले में विधिक रूप से दोषी करार दिया है।
अदालत ने आरोपी कर्मचारी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न कड़ी धाराओं के तहत दोषी पाते हुए पूरे 20 साल के लंबे कानूनी ट्रायल के बाद एक साल के कड़े कारावास (जेल) की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायपीठ ने दोषी पर 15 हजार रुपये का नकद आर्थिक जुर्माना भी अधिरोपित किया है। अदालत ने अपने कड़े आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि दोषी कर्मचारी द्वारा जुर्माने की राशि का समय पर भुगतान नहीं किया जाता है, तो उसे छह माह की अतिरिक्त साधारण सजा काटनी होगी।
वर्ष 2006 का है घूसखोरी का यह मामला, म्यूटेशन के एवज में अटका रखी थी फाइल
आधिकारिक विधिक दस्तावेजों और प्राप्त जानकारी के अनुसार, अंचल कर्मी सत्यनारायण राम पर रिश्वत लेने का यह संगीन मामला अविभाजित रांची और वर्तमान खूंटी जिले के दौर में वर्ष 2006 में दर्ज किया गया था। अभियुक्त सत्यनारायण राम पर सीधा आरोप था कि उसने एक स्थानीय रैयत (भुक्तभोगी) मो. नसीम खान से उनकी जमीन के म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) का सरकारी कागज आगे बढ़ाने और शुद्धि पत्र निर्गत करने के एवज में ₹500 की घूस मांगी थी।
पीड़ित मो. नसीम खान द्वारा रिश्वत की रकम देने में असमर्थता जताने पर आरोपी अंचल कर्मी ने उनके म्यूटेशन के कागजात को रद्दी की टोकरी में डाल दिया था और फाइल को आगे बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया था।
परेशान होकर पीड़ित ने एसीबी से की थी शिकायत, जाल बिछाकर रंगेहाथ दबोचा गया था क्लर्क
भ्रष्ट व्यवस्था और कर्मचारी की रोज-रोज की प्रताड़ना से पूरी तरह परेशान होकर पीड़ित मो. नसीम खान ने तत्कालीन निगरानी ब्यूरो (अब एसीबी) के रांची मुख्यालय में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी की सतर्कता विंग ने अपने स्तर से मामले का गुप्त धरातलीय सत्यापन कराया, जिसमें अंचल कर्मी द्वारा घूस मांगे जाने का मामला शत-प्रतिशत सही पाया गया।
इसके बाद एसीबी की एक विशेष धावा दल (ट्रैपिंग टीम) ने अंचल कार्यालय में जाल बिछाया। जैसे ही पीड़ित ने ₹500 के केमिकल लगे नोट अंचल कर्मी सत्यनारायण राम को थमाए, वैसे ही घात लगाकर बैठी एसीबी की टीम ने उसे रंगेहाथ धर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद तत्कालीन समय में उसे जेल भेज दिया गया था और विभाग ने उसे निलंबित कर दिया था।
जमानत पर बाहर चल रहा था आरोपी, अदालत के फैसले से भ्रष्टाचारियों में हड़कंप
विधिक सूत्रों ने बताया कि जेल जाने के कुछ महीनों बाद अभियुक्त सत्यनारायण राम माननीय उच्च न्यायालय से सशर्त जमानत पाकर जेल से बाहर आ गया था और वर्तमान में बेल पर ही चल रहा था। इस दौरान खूंटी और रांची की विशेष एसीबी अदालत में पिछले 20 वर्षों से इस केस की गवाही और वैज्ञानिक साक्ष्यों का कड़ा परीक्षण चल रहा था।
बृहस्पतिवार को दोनों पक्षों की दलीलें और एसीबी के लोक अभियोजक (PP) द्वारा प्रस्तुत किए गए पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाणों को देखने के बाद विशेष न्यायाधीश ओंकार नाथ चौधरी की अदालत ने आरोपी को दोषी पाते हुए सजा मुकर्रर कर दी। अदालत के इस फैसले के बाद कस्टडी वारंट तैयार कर दोषी को वापस जेल भेजने की विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस ऐतिहासिक फैसले से खूंटी और चतरा के प्रशासनिक महकमों में कमीशनखोरी करने वाले बाबुओं के बीच भारी हड़कंप मच गया है।






















Total Users : 1016790
Total views : 2795282