भूमिहीनों को बेदखली से बचाने और मनरेगा में 200 दिनों के रोजगार पर अड़ा समाज; मांगें पूरी न होने पर दी उग्र आंदोलन की कड़ी चेतावनी
न्यूज स्केल लाइव
हंटरगंज (चतरा): चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड मुख्यालय में शुक्रवार को सुबह लगभग 11 बजे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) के बैनर तले स्थानीय समस्याओं को लेकर एक विशाल जन-आक्रोश और विरोध मार्च निकाला गया। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन में प्रखंड क्षेत्र के सुदूर ग्रामीण इलाकों से आए सैकड़ों की संख्या में खेतिहर मजदूरों, किसानों, आदिवासियों और माकपा कार्यकर्ताओं ने अपनी कड़क आवाज़ बुलंद की।
यह विशाल मार्च हंटरगंज पानी टंकी परिसर से गगनभेदी नारों के साथ शुरू होकर मुख्य बाजार मार्ग होते हुए सीधे प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर पहुंचा। इसके बाद आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने अपनी कड़े विधिक अधिकारों को लेकर प्रखंड कार्यालय के मुख्य द्वार के समक्ष एक दिवसीय विशाल धरना-प्रदर्शन शुरू कर सरकार और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।
गरीबों को वन भूमि का पट्टा देने और जमीन से बेदखली रोकने पर विशेष जोर
धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए माकपा के वरिष्ठ वामपंथी नेताओं ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन की जनविरोधी नीतियों पर तीखा प्रहार किया। पार्टी नेताओं ने गंभीर आरोप लगाया कि हंटरगंज प्रखंड में सदियों से वन भूमि पर बसे गरीब, शोषित और भूमिहीन परिवारों को वनाधिकार पट्टा देने के मामले में जानबूझकर घोर अनदेखी की जा रही है।
नेताओं ने प्रशासन को चेताया कि विकास या अन्य किसी भी बहाने से सुदूर वनों में रह रहे गरीब किसानों को उनकी पुश्तैनी जमीन से बेदखल करने की प्रशासनिक साजिश को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही, जंगली हाथियों और अन्य जंगली जानवरों द्वारा गरीब किसानों की फसलों व घरों को पहुंचाए जा रहे नुकसान का तत्काल उचित विधिक मूल्यांकन कर पीड़ित परिवारों को पर्याप्त सरकारी मुआवजा देने की मांग की गई।
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न्यूनतम मजदूरी ₹600 प्रतिदिन करने और 200 दिन काम देने की उठी कड़क मांग
माकपा ने इस बार ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मजदूरों के पेट से जुड़े कुछ बेहद महत्वपूर्ण विधिक और नीतिगत मुद्दों को पुरजोर तरीके से प्रशासनिक पटल पर रखा है:
न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी: महंगाई की मार को देखते हुए पार्टी ने मजदूरों की दैनिक न्यूनतम मजदूरी को अविलंब बढ़ाकर 600 रुपये प्रतिदिन करने की कड़ा मांग की है।
मनरेगा में 200 दिनों का रोजगार: ग्रामीण क्षेत्रों में पलायन रोकने के लिए ‘मनरेगा’ (MGNREGA) योजना को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू करने तथा मजदूरों को वर्ष में अनिवार्य रूप से न्यूनतम 200 दिनों का सुनिश्चित रोजगार देने की वकालत की गई है।
किसानों को सस्ती बिजली: कृषि कार्य और सिंचाई को सुगम बनाने के लिए हंटरगंज के किसानों को बेहद सस्ती दरों पर कृषि बिजली कनेक्शन और निर्बाध बिजली आपूर्ति देने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो थमेगा चक्का, आर-पार के आंदोलन का अल्टीमेटम
प्रखंड कार्यालय के समक्ष आयोजित इस विशाल धरने में पुरुषों के साथ-साथ भारी संख्या में महिला आंदोलनकारी भी लाल झंडा थामे पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ डटी रहीं। सीपीआई(एम) के जिला और प्रखंड स्तरीय नेताओं ने हंटरगंज प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और अंचलाधिकारी (CO) के नाम एक विस्तृत मांग-पत्र (ज्ञापन) सौंपा।
नेताओं ने दो टूक शब्दों में कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि इन गंभीर व जनहित की मांगों पर शासन स्तर से जल्द ही कोई सकारात्मक और लिखित पहल नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को पूरे चतरा जिले में एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जवाबदेही स्थानीय प्रशासन की होगी। समाचार लिखे जाने तक प्रखंड मुख्यालय के समक्ष माकपा कार्यकर्ताओं का शांतिपूर्ण लेकिन कड़क धरना-प्रदर्शन लगातार जारी था।























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