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रहस्यमयी अग्निकांड: बंद कमरों में रखे बक्से और कपड़ों से अचानक निकलने लगता है धुआं, खौफ में परिवार

On: June 5, 2026 11:51 AM
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शॉर्ट सर्किट नहीं, फिर भी अचानक जल उठते हैं सामान; तन पर बचे कपड़ों के सहारे रातजगा करने को मजबूर हैं ग्रामीण; जिप प्रतिनिधि  और मुखिया ने की विशेषज्ञों की टीम भेजने की मांग

न्यूज स्केल लाइव

हंटरगंज (चतरा): चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड क्षेत्र से एक ऐसी अकल्पनीय और विचलित करने वाली घटना सामने आई है, जिसने न केवल स्थानीय पुलिस-प्रशासन बल्कि आम जनता और बुद्धिजीवियों को भी हैरत में डाल दिया है। हंटरगंज थाना क्षेत्र के नावाडीह-पनारी गांव निवासी धन्नू मिस्त्री के मकान में पिछले कुछ समय से रहस्यमयी तरीके से स्वतः आग लग रही है।

इस अजीबोगरीब सिलसिले के कारण मकान में रखा सारा कपड़ा, अनाज और अन्य कीमती सामान जलकर राख हो गया है, जिससे पीड़ित परिवार को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। वर्तमान में पूरा परिवार और ग्रामीण गहरे खौफ और दहशत के साए में जीने को मजबूर हैं।

न शॉर्ट सर्किट, न चूल्हा: बंद बक्से से अचानक भड़क उठती हैं लपटें

पीड़ित परिवार और प्रत्यक्षदर्शी ग्रामीणों का दावा है कि घर में लग रही यह आग न तो बिजली के शॉर्ट सर्किट (Short Circuit) की वजह से लग रही है और न ही किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या रसोई गैस की खराबी से।

  • आंखों देखा हाल: हैरानी और डर की बात यह है कि मकान के अंदर रखे लोहे के बक्से, आलमारी, बिस्तरों और अन्य घरेलू सामानों से अचानक अपने आप धुआं निकलने लगता है और देखते ही देखते वह हिस्सा धधक उठता है।

  • ग्रामीण भी हैरान: जब भी आग लगने का शोर मचता है, तो ग्रामीण दौड़कर घर के अंदर पहुंचते हैं और वे खुद अपनी आंखों से घर के अलग-अलग बंद कोनों से बिना किसी बाहरी स्रोत के धुआं निकलता हुआ पाते हैं।

एक सप्ताह से बढ़ा तांडव, घर छोड़ने को विवश हुआ पीड़ित परिवार

परिवार के अनुसार, यह समस्या पूरी तरह नई नहीं है। इस तरह की अजीबोगरीब घटनाएं पिछले कई वर्षों से रुक-रुक कर हो रही थीं, जिसे पहले लोगों ने नजरअंदाज कर दिया था। बीच में कुछ समय के लिए यह सिलसिला थम गया था, लेकिन पिछले एक सप्ताह से इन रहस्यमयी घटनाओं ने विकराल रूप धारण कर लिया है।

घर में रखे कीमती सामान और पहनने के कपड़े अचानक जल उठते हैं, जिससे आर्थिक बर्बादी के साथ-साथ अब जान का खतरा भी बना हुआ है। पीड़ित परिवार का कहना है कि वे इस अदृश्य मुसीबत के आगे पूरी तरह बेबस हैं और अब मजबूरी में उन्हें इस पुश्तैनी घर को हमेशा के लिए छोड़ना पड़ेगा।

कपड़े तक जलकर हुए खाक, विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों से मदद की गुहार

डर और बेबसी के आलम में धन्नू मिस्त्री के रोते-बिलखते परिवार ने जिला प्रशासन, वैज्ञानिकों, भू-गर्भ शास्त्रियों और आम जनता से इस रहस्य को सुलझाने की भावुक अपील की है। पीड़ित परिवार ने कहा:

“हम सब बहुत ज्यादा डरे हुए हैं। हमें समझ नहीं आ रहा कि यह ईश्वर का कोई प्रकोप है, कोई वैज्ञानिक कारण है या किसी की शरारत। हम विशेषज्ञों से अपील करते हैं कि कृपया कोई भी इस विषय का जानकार हो, तो आगे आएं और हमारी जांच कर मदद करें, वरना हम सब जिंदा जल जाएंगे।”

पूरे गांव में दहशत, जनप्रतिनिधियों ने की मुआवजे और जांच की मांग

इस अजीबोगरीब घटना के बाद से नावाडीह-पनारी गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग किसी अनहोनी की आशंका से रातजगा (रात भर जागने) करने को विवश हैं। घटना की सूचना मिलते ही कई स्थानीय जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे:

  • जिप सदस्य प्रतिनिधि बेचन पासवान: उन्होंने कहा कि इस घटना से पूरे गांव में दहशत का माहौल है। सरकार और जिला प्रशासन से मांग है कि तत्काल पीड़ित परिवार को आपदा राहत कोष से मुआवजा दिया जाए और विज्ञान विशेषज्ञों (Scientists) की टीम यहां भेजी जाए, ताकि आग लगने का वैज्ञानिक व स्पष्ट कारण मालूम चल सके।

  • मुखिया मदन चौधरी: उन्होंने अत्यंत दुख जताते हुए बताया कि पीड़ित परिवार के पास अब पहनने के लिए एक भी अतिरिक्त कपड़ा नहीं बचा है, सिर्फ तन में जो पहने हैं वही शेष है। प्रशासन को तुरंत इनके लिए कपड़ों और राशन की व्यवस्था करनी चाहिए।

  • पंचायत समिति सदस्य कृष्णा पासवान: उन्होंने बताया कि इसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में जोरों पर है। उन्होंने चतरा उपायुक्त से मांग की है कि पीड़ित परिवार को तत्काल वित्तीय सहायता मुहैया करवाते हुए उनके रहने की कोई वैकल्पिक व सुरक्षित व्यवस्था करवाई जाए।

‘न्यूज स्केल लाइव’ की टिप्पणी: ग्रामीण इलाकों में ऐसी घटनाओं को अक्सर अंधविश्वास या भूत-प्रेत से जोड़कर देखा जाने लगता है, लेकिन विज्ञान में कई बार इसके पीछे फास्फोरस जैसी गैसों का रिसाव या भूमिगत रासायनिक प्रतिक्रियाएं (Spontaneous Combustion) वजह होती हैं। अब देखना यह है कि चतरा जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और कब तक विशेषज्ञों की टीम नावाडीह-पनारी गांव भेजता है।

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