लोहरदगा —भालुओं के बढ़ते हमले ने लोहरदगा में वन पर्यावरण और वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता पैदा कर दी है।
पिछले एक महीने में इंसानों पर भालू के हमले की दो घटनाएं हो चुकी हैं। पाखर, पेशरार और मडुआपाट के जंगलों में भालुओं की गतिविधियां पाई गई है। सबसे ज्यादा तादाद में भालू मडुआ पाट के जंगल में पाए जाते हैं।
लगातार हो रही वनों की कटाई के कारण इन वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर बड़ा खतरा पैदा हो गया है इसलिए इंसानों पर इनके हमले बढ़ते जा रहे हैं। इस क्षेत्र के ग्रामीणों में वन विभाग से मांग की है कि वन कर्मियों को भालुओं का मुकाबला करने की ट्रेनिंग देकर क्षेत्र में नियमित रूप से गश्ती पर भेजा जाए। वन विभाग का हर साल का करोड़ों का बजट है। इसमें वन कर्मियों को शारीरिक और मानसिक ट्रेनिंग के लिए भी अलग बजट का प्रावधान होना चाहिए। नियमित रूप से शारीरिक अभ्यास करके वनकर्मी भालुओं की गतिविधि पर अंकुश लगा सकते हैं। वन कर्मियों को ट्रेनिंग देने में लोहरदगा जिला कुश्ती महासंघ से भी विभाग मदद ले सकता है। इसके बाद प्रशिक्षित वन कर्मियों की तैनाती उस क्षेत्र में किया जाना चाहिए जहां भालू का आतंक अधिक देखा जा रहा है।
इधर मानसून शुरू होने को है। भीषण गर्मी और उमस के इस मौसम में सर्पदंश की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। सिविल सर्जन का कहना है कि लोहरदगा के सभी अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है। मगर अक्सर समय पर अस्पताल नहीं ले जाने से सर्प दंश के शिकार लोगों की मौत हो जाती है।
सर्पदंश के मामलों में कमी लाने के लिए वन विभाग से लगातार मांग की जा रही है कि वन कर्मियों को जहरीले सांपों की पहचान और रेस्क्यू में कुशल बनाया जाए। वनकर्मियों को बीन बजा कर सांपों को वश में करने और उन्हें सुरक्षित जंगल में छोड़ने की भी ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। इससे लोहरदगा जिले में सर्पदंश के मामले कम होंगे और सांपों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी।




















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