लोहरदगा।
सूचना के अधिकार (RTI) के तहत इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के बिहार-झारखंड राज्य कार्यालय से मिली जानकारी में लोहरदगा गैस एजेंसी (राणा चौक) को लेकर कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरटीआई से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, इस गैस एजेंसी के पास कुल 12,419 सक्रिय ग्राहक हैं। लेकिन सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत मुफ्त गैस कनेक्शन पाने वाले सैकड़ों गरीब परिवारों के घरों में आज भी चूल्हा नहीं जल पा रहा है।
उज्ज्वला योजना की जमीनी हकीकत: आधे से अधिक परिवारों ने दोबारा नहीं लिया सिलेंडर
दस्तावेजों के अनुसार, लोहरदगा गैस एजेंसी द्वारा अब तक कुल 2,739 उज्ज्वला (PMUY) कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं, जो नियमों के मुताबिक केवल महिला लाभार्थियों के नाम पर हैं। हालांकि, इनमें से 1,457 उपभोक्ता ऐसे हैं, जिन्होंने कनेक्शन मिलने के बाद से आज तक (स्थापना के पश्चात) एक बार भी सिलेंडर रिफिल नहीं करवाया है। यह आंकड़ा कुल उज्ज्वला कनेक्शनों का लगभग 53 फीसदी है, जो सिलेंडरों की बढ़ती कीमतों या आर्थिक तंगी के कारण इस योजना की जमीनी सफलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
708 उपभोक्ताओं ने छोड़ी सब्सिडी, 8,974 का आधार लिंक
RTI के जवाब में केंद्रीय लोक सूचना पदाधिकारी प्रतीक चटर्जी ने बताया कि डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था के तहत एजेंसी के कुल 8,974 ग्राहकों का आधार (UID) सीडिंग का कार्य पूरा किया जा चुका है। वहीं, समाज के संपन्न वर्ग से ‘गिव इट अप’ मुहिम के तहत अपनी मर्जी से एलपीजी (LPG) सब्सिडी छोड़ने वाले जागरूक उपभोक्ताओं की संख्या 708 दर्ज की गई है।
इसके अलावा, नए कनेक्शनों की रफ्तार में पिछले तीन सालों में हल्की गिरावट देखी गई है। एजेंसी ने:
वर्ष 2023 में: 238 नए कनेक्शन
वर्ष 2024 में: 223 नए कनेक्शन
वर्ष 2025 में: 220 नए कनेक्शन जारी किए हैं।
होम डिलीवरी के नाम पर अतिरिक्त वसूली अवैध
अक्सर ग्रामीण और शहरी इलाकों में डिलीवरी बॉयज द्वारा होम डिलीवरी के नाम पर तय कीमत से ज्यादा पैसे वसूलने की शिकायतें आती हैं। इस पर IOCL ने स्थिति साफ करते हुए बताया है कि घरेलू LPG सिलेंडर की होम डिलीवरी के लिए वितरक या एजेंसी को अलग से कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जाता है और न ही ग्राहकों से कोई पृथक शुल्क लिया जाना चाहिए। यह राशि पूरी तरह से सिलेंडर के रिटेल सेलिंग प्राइस (RSP) में ही समाहित (शामिल) होती है। केवल ‘कैश एंड कैरी रीबेट’ (गोदाम से खुद सिलेंडर ले जाने वाले) का लाभ लेने वाले ग्राहकों को छोड़कर बाकी सभी को होम डिलीवरी देना अनिवार्य है।
कई महत्वपूर्ण सवालों पर कंपनी ने साधी चुप्पी
आरटीआई आवेदक नितेश रंजन भास्कर द्वारा गैस की कालाबाजारी रोकने के उपाय, एक ही पते पर चल रहे मल्टीपल कनेक्शनों की जांच, और एजेंसी के 16 कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन व ईपीएफ (EPF) लाभ जैसे महत्वपूर्ण सवाल भी पूछे गए थे। लेकिन कंपनी ने इन सभी मुद्दों पर यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि ये जानकारियां उनके अभिलेखों में पृथक रूप से संधारित (रिकॉर्ड) नहीं की जाती हैं या ये ‘स्पष्टीकरण और मत’ की श्रेणी में आती हैं, जो आरटीआई अधिनियम के दायरे से बाहर हैं। वहीं, हर महीने आपूर्ति होने वाले सिलेंडरों की संख्या को ‘व्यावसायिक गोपनीयता’ बताते हुए साझा करने से इनकार कर दिया गया।
देरी के लिए खेद जताया
लोक सूचना पदाधिकारी ने आरटीआई का जवाब देने में हुई प्रशासनिक देरी के लिए खेद व्यक्त करते हुए कहा कि कार्यालय में आवेदनों की असामान्य रूप से अधिक संख्या होने के कारण यह विलंब हुआ। यदि आवेदक इस जानकारी से संतुष्ट नहीं हैं, तो वे 30 दिनों के भीतर बिहार राज्य कार्यालय के कार्यकारी निदेशक एवं राज्य प्रमुख श्री अनुप कुमार सामन्तराय के समक्ष प्रथम अपील दर्ज करा सकते हैं।




















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