ग्रामीणों का आरोप— बिना ग्रामसभा व एनओसी के गैरमजरूआ सरकारी भूमि और बड़की नदी पर जबरन कब्जा; रैयतों का पलटवार— जिनका सड़क से लेना-देना नहीं, वे रच रहे विरोध का ढोंग
न्यूज स्केल लाइव
टंडवा (चतरा): टंडवा प्रखंड अंतर्गत एनटीपीसी चट्टीबारियातू परियोजना से जुड़ी जेएआरएल (JARL) कंपनी की नई कोल ट्रांसपोर्टिंग सड़क का विवाद अब पूरी तरह गर्मा गया है. इस सड़क निर्माण के खिलाफ जहां एक ओर विभिन्न गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने वृंदा मोड़ स्थित देवी मंडप के समीप तेंट गाड़कर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है, वहीं दूसरी ओर जमीन देने वाले मूल रैयतों ने इस विरोध को आधारहीन और निजी स्वार्थ से प्रेरित बताते हुए निर्माण का खुला समर्थन कर दिया है। दोनों पक्षों के आमने-सामने आने से क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है।
पक्ष नंबर 1: आंदोलनकारियों का आरोप— बिना अनुमति बड़की नदी और सरकारी जमीन पर खुदाई
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत मंगलवार को वृंदा मोड़ पर आयोजित धरने की अध्यक्षता विनय बिहारी शरण (सारण) और संचालन जितेंद्र सिंह ने किया। सभा में जेएआरएल कंपनी और एनटीपीसी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
आंदोलनकारी ग्रामीणों के मुख्य तर्क व आरोप:
5 जून से चक्का जाम का अल्टीमेटम: धरना को संबोधित करते हुए विनय बिहारी शरण ने कहा कि जिला प्रशासन अविलंब इस निर्माण कार्य पर रोक लगाए। यदि मांग पूरी नहीं हुई, तो 5 जून से पूरे क्षेत्र में उग्र चक्का जाम आंदोलन शुरू किया जाएगा।
सरकारी रिपोर्ट में अवैध निर्माण की पुष्टि: ग्रामीणों ने पूर्व में अंचल कार्यालय को आवेदन देकर मौजा वृंदा के खाता संख्या-29, प्लॉट संख्या-329 एवं 333 पर अवैध खुदाई की शिकायत की थी। राजस्व उपनिरीक्षक और अंचल अधिकारी (CO) की जांच में पुष्टि हुई है कि यह जमीन ‘गैरमजरूआ खास’ किस्म की सरकारी भूमि है, जिस पर कंपनी बिना किसी सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के जबरन सड़क बना रही है।
नदी और पुल को खतरा: प्रस्तावित सड़क खधैया स्थित बड़की नदी के बेहद करीब से गुजरती है। इससे नदी के अस्तित्व, स्थानीय पर्यावरण, कृषि भूमि और पशुधन को भारी नुकसान होगा। साथ ही, सिमरिया-टंडवा मुख्य मार्ग के तीखे मोड़ (ब्लाइंड कर्व) और पुल के पास भारी कोयला वाहनों के परिचालन से हर वक्त बड़े हादसों का डर बना रहेगा।
धरने में मुख्य रूप से देवंती देवी, मुखिया सुबेश राम, सुरेश यादव, उपेंद्र यादव, खेमन राम, रेशमा देवी, प्रवीण, रोहन महतो, भुनेश्वर यादव, सुरेश ठाकुर, दिलीप महतो और सुरेंद्र राम समेत सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।
पक्ष नंबर 2: जमीन दाता रैयतों का दावा— ‘सड़क बनने से घटेंगे हादसे, बाहरी लोग कर रहे राजनीति’
इधर, इस आंदोलन के समानांतर सड़क निर्माण के लिए अपनी जमीन देने वाले कबरा, उरदा, काढ़मदिरी, सिसई, बुटखेता, बिरहोराटाँड, खधेया और वृंदा गांव के मूल रैयत निर्माण के पक्ष में लामबंद हो गए हैं।
जमीन दाता रैयतों का पक्ष:
विरोध करने वालों का जमीन से नाता नहीं: अपनी जमीनों पर ट्रांसपोर्टिंग सड़क बनवा रहे मूल रैयतों— प्रयाग महतो, सुबोध महतो और रमजान मियां ने दो टूक कहा है कि जिनकी जमीन पर सड़क बन रही है, उन्हें इस निर्माण से कोई आपत्ति या विरोध नहीं है। जो लोग विरोध कर रहे हैं, उनका इस सड़क और जमीन से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।
निजी स्वार्थ का ढोंग: रैयतों ने सीधा आरोप लगाया कि कुछ लोग अपनी राजनीति चमकाने और अपने निजी स्वार्थ की पूर्ति के लिए सीधे-साधे ग्रामीणों को भड़काकर विरोध का ढोंग रच रहे हैं।
आम जनता को मिलेगी राहत: रैयतों का तर्क है कि मुख्य मार्ग से अलग एक नई और स्वतंत्र कोल ट्रांसपोर्टिंग सड़क बन जाने से सिमरिया-टंडवा मुख्य पथ पर चलने वाले आम राहगीरों को भारी वाहनों के जाम से मुक्ति मिलेगी और क्षेत्र में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में भारी कमी आएगी।
वर्तमान में स्थिति यह है कि एक तरफ जहां कंपनी के काम को वैधानिक अधिसूचना और ग्रामसभा की स्वीकृति मिलने तक ठप रखने के लिए धरना स्थल पर ग्रामीण डटे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ विकास और सुरक्षा का हवाला देकर रैयत काम शुरू कराने के पक्ष में हैं। अब देखना यह होगा कि चतरा जिला प्रशासन 5 जून की चक्का जाम की चेतावनी से पहले इस दोहरे विवाद का क्या शांतिपूर्ण और कानूनी समाधान निकालता है।




















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