मुआवजा और नौकरी की मांग को लेकर आर-पार के मूड में विस्थापित; अध्यक्ष बोले—रैयतों की सहमति के बिना प्रबंधन की मनमानी बर्दाश्त नहीं, तनाव कायम
न्यूज स्केल लाइव
टंडवा (चतरा): टंडवा प्रखंड क्षेत्र में सीसीएल (CCL) प्रबंधन और विस्थापितों के बीच जमीन व रोजगार का विवाद एक बार फिर गहरा गया है। चंद्रगुप्त विस्थापित मोर्चा के बैनर तले आक्रोशित रैयतों ने सीसीएल की नई कोल ट्रांसपोर्टिंग सड़क के निर्माण कार्य को पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिया है।
मंगलवार को भारी संख्या में मोर्चा से जुड़े विस्थापित और ग्रामीण निर्माण स्थल पर पहुंचे। रैयतों ने न सिर्फ चल रहे काम को जबरन रुकवाया, बल्कि निर्माणाधीन सड़क पर ही बुलडोजर चलवाकर मिट्टी डाल दी और मुख्य मार्ग को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया। इस घटना के बाद से पूरे कोयलांचल क्षेत्र में भारी तनाव की स्थिति बनी हुई है।
बगैर सहमति के जमीन पर कब्जे का आरोप, ‘एक इंच भी आगे नहीं बढ़ेगी सड़क’
मोर्चा के अध्यक्ष सह प्रबुद्ध समाजसेवी सुभाष दास ने मौके पर प्रबंधन के खिलाफ हुंकार भरते हुए स्पष्ट किया कि सीसीएल और यहां निर्माण कार्य में जुटी ‘शुश्री कंपनी’ रैयतों की जमीन पर बिना किसी वैधानिक सहमति और बातचीत के जबरन काम करा रही है।
सुभाष दास ने कड़े लहजे में कहा:
“प्रबंधन की यह तानाशाही और मनमानी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जमीन हमारी है, तो फैसला भी हमारी सहमति और शर्तों पर ही होगा। जब तक सीसीएल और संबंधित आउटसोर्सिंग कंपनी रैयतों को उचित मुआवजा और नियमानुसार नौकरी देने के वादे को पूरा नहीं करती, तब तक प्रबंधन इस जमीन पर एक इंच भी सड़क आगे नहीं बना सकता है।”
काम पूरी तरह बाधित, ठोस निर्णय तक अनिश्चितकालीन बंदी का ऐलान
प्रदर्शन स्थल पर जुटे उग्र विस्थापितों और रैयतों ने दो टूक शब्दों में कहा कि पूर्व में भी कई बार वार्ता के नाम पर केवल खोखला आश्वासन दिया गया, लेकिन धरातल पर स्थानीय बेरोजगारों और प्रभावित परिवारों को उनका हक नहीं मिला।
प्रदर्शनकारियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए ऐलान किया है कि जब तक सीसीएल के उच्चाधिकारी और कंपनी प्रबंधन उनकी जायज मांगों पर कोई ठोस और लिखित निर्णय नहीं लेते, तब तक ट्रांसपोर्टिंग रोड का निर्माण कार्य किसी भी कीमत पर शुरू नहीं होने दिया जाएगा। ग्रामीणों के इस आक्रामक तेवर के कारण भारी मशीनें और मजदूर जहां के तहां खड़े हैं और निर्माण कार्य पूरी तरह से ठप हो गया है। स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मामले पर नजर बनाए हुए हैं।




















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