केंद्रीय कारागार में काराधीक्षक स्तर के अधिकारी पर गंभीर आरोप; फाइलों को दबाने और गवाहों के अचानक तबादले की चर्चा, विपक्ष ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
रांची | न्यूज स्केल लाइव
झारखंड की राजधानी रांची स्थित होटवार के बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल को लेकर सामने आए बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोपों ने राज्य की जेल व्यवस्था, महिला सुरक्षा और प्रशासनिक तंत्र पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। जिस जेल को कानून, सुरक्षा और सुधार का सुरक्षित केंद्र माना जाता है, वहीं से एक महिला कैदी के कथित यौन शोषण और उसके गर्भवती होने जैसे संगीन दावों ने पूरे सूबे के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। इस पूरे मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरंडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर पोस्ट साझा कर मामले को बेहद गंभीर बताया है।
काराधीक्षक स्तर के अधिकारी पर गंभीर आरोप, फाइलें दबाने की कोशिश!
आरोप है कि जेल के भीतर बंद एक महिला कैदी का कथित तौर पर काराधीक्षक (Jail Superintendent) स्तर के एक रसूखदार अधिकारी द्वारा लगातार शारीरिक और मानसिक शोषण किया गया, जिसके बाद महिला के गर्भवती होने की बात प्रकाश में आई। मिली जानकारी के अनुसार, इस खौफनाक घटना की जानकारी सामने आने के बाद तत्काल कानूनी कार्रवाई करने या प्राथमिकी दर्ज करने के बजाय, कुछ वरिष्ठ अधिकारी पूरे मामले को रफा-दफा करने और दबाने में जुट गए। आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि जेल प्रशासन के उच्च पदों पर बैठे कुछ चेहरों ने फाइलों और दस्तावेजों को नियंत्रित कर मामले को शांत कराने की कोशिश की है।
सबूत मिटाने के लिए मेडिकल साक्ष्यों से छेड़छाड़ का संदेह?
इस मामले को जो बात सबसे ज्यादा रहस्यमयी और गंभीर बनाती है, वह यह है कि पीड़ित महिला कैदी को इलाज और स्वास्थ्य जांच के नाम पर कई बार जेल परिसर से बाहर ले जाया गया।
साक्ष्यों को प्रभावित करने का आरोप: सूत्रों के अनुसार, आरोप है कि ऐसा संभावित सबूतों और मेडिकल साक्ष्यों को प्रभावित करने या मिटाने के उद्देश्य से किया गया था। हालांकि, इन दावों की अभी तक कोई स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। कर्मचारियों का अचानक तबादला: संदेह की सूई तब और गहरी हो गई जब यह बात सामने आई कि जेल के भीतर की गतिविधियों से जुड़े कुछ विभागीय कर्मचारियों और संभावित गवाहों का हाल ही में अचानक ट्रांसफर (तबादला) कर दिया गया है।
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सियासत गरमाई: नेता प्रतिपक्ष ने घेरा, उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज
इस पूरे प्रकरण ने राज्य की जेल सुरक्षा व्यवस्था और महिला कैदियों की सुरक्षा पर गंभीर बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे मामले को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
“सवाल उठ रहे हैं कि अगर चौबीसों घंटे सीसीटीवी (CCTV) और सुरक्षा प्रहरियों की अत्यधिक निगरानी वाली जगह में एक महिला कैदी के साथ इस तरह की हैवानियत के आरोप सामने आते हैं, तो बाहर आम महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्या संदेश जाएगा? राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अब यह मांग पुरजोर तरीके से उठ रही है कि पूरे मामले की किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी या उच्चस्तरीय न्यायिक समिति से निष्पक्ष जांच कराई जाए।”
कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि यह आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो दोषियों पर ऐसी सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए जो मिसाल बने, चाहे वे प्रशासनिक तंत्र में कितने ही ऊंचे पद पर क्यों न बैठे हों। फिलहाल इस पूरे विवाद पर राज्य सरकार या जेल प्रशासन की ओर से किसी विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन इस मामले ने सिस्टम के भीतर की बड़ी खामियों को उजागर कर दिया है।




















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