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झारखंड राज्यसभा चुनाव: सत्ता पक्ष में ‘दावेदारी’ की जंग, क्या क्रॉस वोटिंग से बाजी पलटेगी भाजपा?

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न्यूज स्केल डेस्क: झारखंड के सियासी गलियारों में राज्यसभा की दो सीटों को लेकर हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जहां सत्तारूढ़ गठबंधन (JMM-Congress-RJD) अपनी एकजुटता के दम पर दोनों सीटें झटकने की फिराक में है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल भाजपा ने अपनी रणनीतिक बिसात बिछाकर मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने के संकेत दे दिए हैं।

सत्ता पक्ष में खींचतान: जेएमएम बनाम कांग्रेस?

सत्तारूढ़ गठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का मजबूत आंकड़ा है, जो तकनीकी रूप से दो सीटों पर जीत (प्रति सीट 28 वोट) के लिए पर्याप्त है। लेकिन असली पेंच ‘हिस्सेदारी’ को लेकर फंसा है:

भाजपा का ‘प्लान-बी’ और सीता सोरेन का नाम

भले ही भाजपा और उसके सहयोगियों (आजसू, जदयू, लोजपा) के पास केवल 24 वोट हैं, लेकिन पार्टी हार मानने को तैयार नहीं है।

  • रणनीति: भाजपा को जीत के लिए केवल 4 अतिरिक्त वोटों की दरकार है। ऐसे में ‘क्रॉस वोटिंग’ की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।

  • सीता सोरेन फैक्टर: चर्चा है कि भाजपा सीता सोरेन को मैदान में उतारकर चुनाव को हाई-प्रोफाइल बना सकती है। यदि ऐसा होता है, तो गठबंधन के भीतर सेंधमारी की कोशिशें तेज हो सकती हैं।

संख्या बल का गणित: एक नजर में

पक्षविधायक संख्याजीत के लिए जरूरी (2 सीटें)स्थिति
गठबंधन (JMM+)5656 (28 प्रति सीट)बहुमत है, पर आपसी तालमेल चुनौती।
विपक्ष (BJP+)2428 (1 सीट के लिए)4 वोट कम, रणनीतिक समर्थन की तलाश।

 

झारखंड की ये दो सीटें केवल राज्यसभा का प्रतिनिधित्व नहीं हैं, बल्कि यह आगामी विधानसभा चुनावों से पहले गठबंधन की मजबूती और भाजपा की ‘चाणक्य नीति’ का लिटमस टेस्ट भी साबित होंगी। क्या झामुमो-कांग्रेस का साथ बना रहेगा या भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’ कोई नया चमत्कार दिखाएगा? नजरें टिकी रहेंगी।

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