गांव में पसरा मातमी सन्नाटा, तीन मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया; घर लाने के लिए ग्रामीणों ने चंदे से की एम्बुलेंस की व्यवस्था, राज्य सरकार के श्रम विभाग से तत्काल मुआवजे की मांग
हंटरगंज (चतरा) | न्यूज स्केल लाइव
रोजी-रोटी की तलाश और घरेलू मुफलिसी को दूर करने के लिए चतरा जिले के सुदूरवर्ती गांवों से महानगरों की ओर होने वाला मानव पलायन एक बार फिर अभिशाप बन कर सामने आया है। चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत वशिष्ठ नगर जोरी थाना क्षेत्र के दंतार गांव निवासी प्रवासी मजदूर निरंजन कुमार (27 वर्ष) पलायन की भेंट चढ़ गए हैं।
आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में एक स्थानीय झील से निरंजन का शव संदेहास्पद परिस्थितियों में बरामद किया गया है। मौत की इस खौफनाक खबर के बाद से मृतक के पैतृक गांव दंतार में कोहराम मच गया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
धोखे से ले गया था ठेकेदार; ग्लूकोज के बहाने जबरन कराया जा रहा था केमिकल का काम
प्राप्त विदारक और जमीनी जानकारी के अनुसार, दंतार निवासी बृजमोहन ठाकुर का 27 वर्षीय पुत्र निरंजन कुमार बीते 19 मई 2026 को अपने घर से एक स्थानीय ठेकेदार और 12 अन्य मजदूर साथियों के साथ आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम (अन्नवरम्) मजदूरी करने के लिए निकला था। घर से ले जाते वक्त शातिर ठेकेदार ने मजदूरों को झांसा दिया था कि उन्हें एक ग्लूकोज (Glucose) बनाने वाली सुरक्षित फैक्ट्री में काम दिलाएगा।
लेकिन वहां पहुंचने के बाद मजदूरों के पैरों तले जमीन खिसक गई। ठेकेदार और फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा मजदूरों से ग्लूकोज के बजाय बेहद खतरनाक कैमिकल (मुर्गी का दाना) बनाने का काम जबरदस्ती करवाया जाने लगा। जहरीले केमिकल और विपरीत परिस्थितियों का कड़ा विरोध करते हुए निरंजन ने अपने साथी मजदूरों से कहा कि वह इस जानलेवा फैक्ट्री में काम नहीं करेगा और वापस अपने घर जाएगा। यही कहकर निरंजन फैक्ट्री परिसर से बाहर निकल गया, लेकिन दो दिन बीत जाने के बाद भी वह घर नहीं पहुंचा।
झील से बरामद हुआ संदिग्ध शव; परिजनों की आर्थिक स्थिति इतनी बदहाल कि चंदे से आ रही लाश
इधर घर पर रह रहे परिजन लगातार निरंजन से संपर्क करने का प्रयास कर रहे थे और किसी अनहोनी की आशंका से उनका पूरा परिवार सहमा हुआ था। इसी बीच, आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम स्थित एक झील से थोड़ांगी थाना पुलिस ने रविवार को निरंजन कुमार का संदिग्ध परिस्थितियों में तैरता हुआ शव बरामद किया। थोड़ांगी पुलिस ने विधिक प्रक्रिया के तहत शव को कब्जे में लेकर जिला सरकारी एरिया हॉस्पिटल (टूनी) में अंत्यपरीक्षण (पोस्टमार्टम) के लिए भेज दिया। इसकी सूचना जब मृतक के सहकर्मियों ने दंतार में रहने वाले परिजनों को फोन पर दी, तो घर में हाहाकार मच गया।
निरंजन के बूढ़े माता-पिता, पत्नी और तीन छोटे-छोटे मासूम बच्चे दहाड़ मारकर रोने लगे। परिवार की अत्यंत दयनीय आर्थिक स्थिति और कंगाली का आलम यह था कि विशाखापट्टनम से शव को वापस दंतार गांव लाने के लिए उनके पास फूटी कौड़ी भी नसीब नहीं थी। अंततः मानवीय संवेदना दिखाते हुए दंतार के प्रबुद्ध ग्रामीणों ने खुद आपस में चंदा जुटाकर शव को झारखंड लाने के लिए एम्बुलेंस की विधिक व्यवस्था की है।
घर का इकलौता कमाऊ सदस्य था निरंजन; तीन मासूम बच्चों के भविष्य पर लगा ग्रहण
मृतक निरंजन अपने पूरे संयुक्त परिवार में मात्र एक ही कमाऊ सदस्य था, जिसके कंधों पर बूढ़े माता-पिता और पत्नी सहित तीन छोटे-छोटे बच्चों के भरण-पोषण की पूरी विधिक जिम्मेदारी थी। पिता की इस बेसमय और संदेहास्पद मौत से मासूम बच्चे गहरे सदमे में हैं और उनके भविष्य पर अंधकार का ग्रहण लग गया है।
इस घटना से आक्रोशित और मर्माहत ग्रामीणों ने चतरा जिला प्रशासन, उपायुक्त रवि आनंद और राज्य सरकार के श्रम विभाग (Labour Department) से पीड़ित परिवार की लाचारी को देखते हुए अविलंब सरकारी सहायता राशि और विशेष मुआवजे की मांग की है।
न्यूज़ स्केल लाइव का सुलगता सवाल: आखिर चतरा के इस पलायन का जिम्मेदार कौन?
रोजी-रोटी और दो वक्त की रोटी की तलाश में छोटे-छोटे गांवों से महानगरों के चक्रव्यूह के लिए पलायन करना चतरा की एक सामान्य और कड़वी सच्चाई बन चुकी है। जहां कुछ मजदूर अपनी दिन-रात की हाड़-तोड़ मेहनत के बल पर घर पैसा भेजने में कामयाब होते हैं, वहीं निरंजन जैसे कई होनहार युवा आए दिन बड़े राज्यों के सिंडिकेट और हादसों का शिकार होकर कफन में लिपटकर वापस आते हैं।
आखिर इसका असली जिम्मेदार कौन है? स्थानीय स्तर पर रोजगार देने में नाकाम हमारा सिस्टम, या वे बिचौलिए और फर्जी ठेकेदार जो चंद पैसों के कमीशन के लिए हमारे भोले-भाले ग्रामीण युवाओं को धोखे के जाल में फंसाकर मौत के मुंह में धकेल देते हैं? चतरा की जनता अब इन सफेदपोश ठेकेदारों के खिलाफ सीधे और कड़े विधिक एक्शन की मांग कर रही है।





















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