सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में घायलों को दिया गया एंटी-रेबीज इंजेक्शन, कई लोग शिकार, वन विभाग को सूचना के बाद भी नहीं उठाया गया कोई ठोस कदम
इटखोरी (चतरा) | न्यूज स्केल लाइव
चतरा जिले के इटखोरी थाना क्षेत्र के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में इन दिनों एक आक्रामक और बेकाबू बंदर ने भारी आतंक मचा रखा है। इस आक्रामक बंदर के हिंसक हमले में अब तक पांच (5) ग्रामीण गंभीर रूप से कटकर लहूलुहान और घायल हो गए हैं। अचानक हुए इस वन्यजीव के हमले से समूचे इटखोरी प्रखंड और ग्रामीण इलाकों के आम नागरिकों के बीच भारी दहशत और खौफ का माहौल व्याप्त हो गया है। लोग लाठी-डंडे लेकर घरों से बाहर निकलने को मजबूर हैं।
अस्पताल में मची अफरा-तफरी; घायलों को लगा एंटी-रेबीज का इंजेक्शन
बंदर के हिंसक हमले का शिकार हुए सभी पांचों घायलों को स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों की मदद से तुरंत इलाज के लिए इटखोरी स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भर्ती कराया गया। अस्पताल में मुस्तैद डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों द्वारा सभी घायलों का त्वरित प्राथमिक उपचार किया गया।
डॉक्टरों ने संक्रमण के खतरे को देखते हुए सभी पीड़ितों को कड़ाई से एंटी-रेबीज (Anti-Rabies) का इंजेक्शन लगाया और आवश्यक दवाइयां देने के बाद उन्हें घर भेज दिया। डॉक्टरों ने घायलों को विशेष एहतियात बरतने की सलाह दी है।
इस आक्रामक बंदर के कोप का शिकार हुए घायलों में मुख्य रूप से निम्नलिखित नाम शामिल हैं: रोहित भुइयाँ पिता- कारू भुइयाँ, निवासी- धनखेरी) अंजन पासवान पिता- अजय पासवान) कृष्णा कुमार (पिता- मनोज साव, निवासी- मयूरहंड) इनके अलावा दो अन्य ग्रामीण भी इस बंदर के दांतों और नाखूनों के हमले से बुरी तरह घायल हुए हैं।
वन विभाग को सूचना के बाद भी पसरा सन्नाटा; ग्रामीणों में भारी आक्रोश
इस गंभीर समस्या और बंदर के लगातार बढ़ते हिंसक हमलों को लेकर स्थानीय ग्रामीणों द्वारा चतरा वन विभाग (Forest Department) के अधिकारियों को लिखित और फोन पर तत्काल सूचना दे दी गई है। लेकिन प्रशासनिक संवेदनहीनता का आलम यह है कि सूचना दिए जाने के कई घंटे बीत जाने के बाद भी वन विभाग की टीम द्वारा इस आक्रामक बंदर को पकड़ने या रेस्क्यू करने के लिए धरातल पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
वन विभाग की इसी सुस्ती और ढुलमुल रवैए के कारण दुवारी और धनखेरी सहित आसपास के ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वन विभाग ने पिंजरा लगाकर इस बंदर को जल्द काबू में नहीं किया, तो वे उग्र आंदोलन को विवश होंगे।





















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