चतरा। जिले के लगभग सभी प्रखंडों में संचालित धान अधिप्राप्ति केंद्रों पर इन दिनों ताला लटका हुआ है। जिला प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण किसानों से समय पर धान की खरीद नहीं हो पा रही है, जिससे किसानों के साथ-साथ पैक्स (प्राथमिक कृषि साख समिति) अध्यक्षों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। गौरतलब है कि सरकार द्वारा 15 दिसंबर से सभी प्रखंडों में धान अधिप्राप्ति केंद्रों का विधिवत उद्घाटन किया गया था। उद्घाटन के दौरान माननीय जनप्रतिनिधियों ने किसानों को आश्वस्त किया था कि वे बिचौलियों के हाथों धान न बेचें, सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य 2450 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीद करेगी और 48 घंटे के भीतर भुगतान सीधे किसानों के खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा। हालांकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। सरकार के ये सभी दावे अब खोखले साबित होते जा रहे हैं। पैक्स गोदामों में पहले से रखा धान उठाव नहीं होने के कारण पूरी तरह भर चुका है। जिला प्रशासन द्वारा समय पर धान का उठाव नहीं किए जाने से खरीद प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई है। मजबूरी में पैक्स अध्यक्षों को किसानों का धान खरीदने से इनकार करना पड़ रहा है, जिसका सीधा ठीकरा प्रशासनिक लापरवाही पर फूट रहा है। किसानों का कहना है कि धान पूरी तरह तैयार है, लेकिन अधिप्राप्ति केंद्र बंद होने के कारण उन्हें खुले बाजार या बिचौलियों के हाथों औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं पैक्स अध्यक्षों ने जिला प्रशासन से अविलंब धान उठाव की प्रक्रिया तेज करने और अधिप्राप्ति केंद्रों को नियमित रूप से संचालित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय पर धान का उठाव सुनिश्चित किया जाए तो न किसानों को परेशानी होगी और न ही पैक्स को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
धान अधिप्राप्ति केंद्रों पर ताला, किसान और पैक्स अध्यक्ष परेशान, प्रशासनिक लापरवाही से खरीद ठप
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