जिस धरती को कभी संघर्ष और उग्रवाद के नाम से जाना गया, आज वहीं से एक नई रोशनी उठी है। सीमित संसाधन, गांव की पगडंडियां और साधारण स्कूल—लेकिन सपने असाधारण। एक बेटी ने अपने संकल्प, शिक्षा और अनुशासन के बल पर वह कर दिखाया, जो पूरे इलाके के लिए मिसाल बन गया।
झारखंड लोक सेवा आयोग की कठिन परीक्षा में सफलता हासिल कर जब एक ग्रामीण बेटी प्रशासनिक सेवा तक पहुँची, तो यह सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं रही—यह उस बदलाव का प्रतीक बन गई, जो बताता है कि अब यह क्षेत्र डर नहीं, प्रतिभा और परिश्रम से पहचाना जाएगा।
प्रतापपुर (चतरा)। संघर्ष, शिक्षा और संकल्प की मिसाल बनता प्रतापपुर प्रखंड अब अपनी पहचान बदल रहा है। कभी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाने वाला यह इलाका आज शिक्षा, जागरूकता और प्रशासनिक सफलता की नई कहानी लिख रहा है। इसी बदलाव की सशक्त प्रतीक बनकर उभरी हैं नारायणपुर गांव की बेटी अंकिता कुमारी मिश्रा, जिन्होंने झारखंड लोक सेवा आयोग की कठिन परीक्षा में सफलता हासिल कर बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) के पद पर चयनित होकर पूरे प्रतापपुर प्रखंड और चतरा जिले का नाम रोशन किया है। प्रोफेसर सुरेश मिश्रा की पुत्री अंकिता की यह उपलब्धि किसी महानगर की सुविधाओं की देन नहीं, बल्कि गांव के विद्यालय, सीमित संसाधनों और अथक परिश्रम का परिणाम है। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा से लेकर मैट्रिक और इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई गांव में रहकर पूरी की। इसके बाद हंटरगंज कॉलेज से स्नातक, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर तथा चतरा कॉलेज, चतरा से बीएड की शिक्षा प्राप्त की। निरंतर अध्ययन, आत्मअनुशासन और स्पष्ट लक्ष्य ने उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया। इस सफलता के पीछे एक शिक्षित, संस्कारित और मार्गदर्शक परिवार की अहम भूमिका रही। बड़े भाई विजय मिश्रा (सहायक अध्यापक) और छोटे भाई निशांत कुमार (वनरक्षक) ने तैयारी में मार्गदर्शन दिया। भाई आलोक मिश्रा रोजगार सेवक हैं, जबकि बड़ी बहन अस्मिता कुमारी डोभी हाई स्कूल में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं। परिवार के प्रेरणास्तंभ पिता प्रोफेसर सुरेश मिश्रा (सोभ कॉलेज, बाराचट्टी) ने शिक्षा के साथ ईमानदारी, सेवा भावना और सामाजिक दायित्व के संस्कार दिए-जिसका प्रतिफल आज पूरे क्षेत्र के सामने है। अंकिता के सीडीपीओ पद पर चयन से नारायणपुर गांव, प्रतापपुर प्रखंड और पूरे चतरा जिले में खुशी और उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोग इसे केवल एक बेटी की सफलता नहीं, बल्कि प्रतापपुर के उज्ज्वल भविष्य का संकेत मान रहे हैं। गांव में रहकर बड़े सपने देखने वाले हजारों युवाओं के लिए अंकिता आज प्रेरणा बन चुकी हैं। प्रतापपुर अब अपने अतीत से नहीं, बल्कि प्रतिभा, परिश्रम और उपलब्धियों से पहचाना जाएगा। अंकिता कुमारी मिश्रा जैसी बेटियाँ इस परिवर्तन की सशक्त आवाज़ हैं, जो यह संदेश देती हैं “मेहनत, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास हो, तो गांव की पगडंडियों से भी प्रशासनिक सेवा तक का सफर तय किया जा सकता है।”








