लोहरदगा।
लोहरदगा जिले के आदिवासी सांस्कृतिक कला भवन, कुटुमू कचहरी मोड़ में रविवार 11 जनवरी 2026 को जिला राजी पड़हा व्यवस्था, लोहरदगा के तत्वावधान में पेसा कानून पर एकदिवसीय कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य पेसा कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाना और आदिवासी स्वशासन व पड़हा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करना रहा।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि निशा उरांव (इनकम टैक्स डायरेक्टर) रहीं। उन्होंने पेसा कानून पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कानून आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाया गया है, लेकिन इसके क्रियान्वयन में कई व्यवहारिक कमियां सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा को वास्तविक रूप से सशक्त बनाए बिना पेसा कानून का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता, इसलिए सरकार को इसमें आवश्यक सुधार करने चाहिए।
विशिष्ट अतिथि सामाजिक कार्यकर्ता एवं संयोजक जनजाति हित रक्षा मंच झारखंड संदीप उरांव ने पेसा कानून के प्रावधानों को सरल और प्रभावी तरीके से समझाया। उन्होंने कहा कि यदि समाज जागरूक और संगठित हो, तो पेसा कानून आदिवासी हितों की रक्षा का सशक्त माध्यम बन सकता है।
कार्यक्रम में अरविंद उरांव ने प्रेरणादायक संदेश देते हुए कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने संवैधानिक और पारंपरिक अधिकारों के प्रति जागरूक होना होगा, तभी पेसा कानून का वास्तविक लाभ मिल सकेगा। कार्यशाला की अध्यक्षता लक्ष्मी नारायण भगत (वेल) ने की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने पड़हा व्यवस्था और समाज को मजबूत करने के लिए एकजुटता, संगठन और पारंपरिक संस्थाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम का स्वागत भाषण मीडिया प्रभारी जगदीप भगत ने दिया, जबकि सभा का संचालन सुखदेव उरांव (उप कोटवार) ने किया।
कार्यशाला में जिले एवं अन्य संगठनों के कई गणमान्य प्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से— सोमदेव उरांव (अध्यक्ष, सरना प्रार्थना सभा), विजय उरांव (अध्यक्ष, पारंपरिक पड़हा व्यवस्था), बुद्धेश्वर उरांव (उप वेल), वीरेंद्र उरांव (उप दीवान), बजरंग उरांव (कोटवार), डुमना उरांव (उप कोटवार), मंजन उरांव (उप जोक बेल), संजय कुमार भगत, रामप्रसाद उरांव, पवन तिग्गा, जतरू उरांव, सोमे उरांव, गोसाई भगत (भंडारी) तथा सुरेंद्र उरांव (मीडिया प्रभारी) सहित पूरे जिले के वेल, दीवान, कोटवार, पाहन, पुजारी, महतो और समाज के अनेक बुद्धिजीवी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान भोजन-पानी की उत्तम व्यवस्था की गई थी। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। यह कार्यशाला पेसा कानून के प्रति जनजागरूकता फैलाने, आदिवासी स्वशासन, पड़हा व्यवस्था और सामाजिक एकता को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।


















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