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बिन ब्याही 13 वर्ष की नाबालिग बनी मां, बच्चे को दिया जन्म, बाल संरक्षण विभाग व संस्थाए दौड़ा रहे हैं कागजी घोड़ा, डीसीपीओ का कहना है जन जागरूकता अभियान चला रहे हैं

On: September 27, 2025 12:33 PM
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रांची/खूंटी। बाल हिंसा पर रोक व संरक्षण को लेकर भले ही सरकार द्वारा झारखंड में लाखों नही करोड़ों रुपये बाल सरंक्षण विभाग व स्वंयसेवी संस्थाओं के माध्यम से खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन विडंबना यह है कि न बाल हिंसाओं में कमी आई है और ना ही सही से जरुरतमंद नाबालिगों को संरक्षण मिल पा रहा है। हां एक काम जरुर हो रहा है झारखंड में विभाग व इस क्षेत्र में कार्य कर रही संस्थाएं उपलब्धियों की सूची तैयार करने में महारत हासील की है। उपरोक्त बातों का महज एक प्रमाण है खूंटी जिले में बिन ब्याही नाबालिग के मां बनने का मामला। बताया जाता है कि जिले के सदर अस्पताल में डॉक्टर उस समय दंग रह गए जब एक नाबालिग लड़की प्रसव के लिए पहुंची। इलाज के बाद नाबालिग लड़की ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। नाबालिग मुरहू प्रखंड की रहने वाली बताई जा रही है। 13 साल की गर्भवती लड़की को उसकी मां सदर अस्पताल लेकर आई थी। बाद में नवजात शिशु का पिता भी अस्पताल पहुंचा, जो खुद भी नाबालिग है और उसकी उम्र 15 वर्ष है। सिविल सर्जन ने मामले की पुष्टि की है। बीते मंगलवार रात खूंटी सदर अस्पताल में एक 13 साल की नाबालिग ने एक बच्ची को जन्म दिया। डॉक्टरों के अनुसार, बच्ची का जन्म समय से पहले सात महीने में ही हुआ और उसका वजन 2,070 किलोग्राम था। दोनों की हालत फिलहाल सामान्य बताई जा रही है।

विडंबना यह है की भारी भरकम खर्च कर उपरोक्त घटनाओं को रोकने के लिए एक समुह कार्य कर रहा है। पर सवाल उठता है कहा कर रहा है। क्योंकी बिन ब्याही किशोरी की मां ने बताया कि किशोरी पढ़ाई के लिए मुरहू से लगभग 14 किलोमीटर दूर अपने गांव में किराए के मकान में रह रही थी और नौवीं कक्षा की छात्रा थी। इसी दौरान उसकी जान-पहचान पड़ोस के गांव के एक 15 वर्षीय लड़के से हुई। दोनो के बीच संबंध बढ़ती गईं और नाबालिग गर्भवती हो गई। स्थिति बिगड़ने पर उसके परिजनों ने उसे लड़के के घर भेज दिया। 15 वर्षीय लड़का, जो उसका सामाजिक पति नहीं है, ढुकु प्रथा (लिव-इन रिलेशनशिप) के तहत उसके साथ रह रहा है।

ताजुब है कि जिसके जिम्मे ऐसे नाबालिगों के संरक्षण की जिम्मेवारी है वही जागरुक्ता की बात करते हैं। ऐसे में प्रश्न उठता है कि जागरुक्ता की राशि खर्च कहा हो जाती है। इस मामले में जिला बाल संरक्षण अधिकारी अल्ताफ अंसारी का कहा है कि यह एक गंभीर मुद्दा है और इसके लिए जन जागरूकता की आवश्यकता है। बाल संरक्षण विभाग ग्रामीण क्षेत्र में जन जागरूकता अभियान चला रहा है। इसमें समाज को भी आगे आना होगा।

ज्ञात हो कि यह पहला मामला नहीं है, इससे पूर्व भी कई मामले आए हैं। वहीं चतरा जिले में भी इस तरह की घटनाए आ चुकी है। पर विभाग के जिम्मेवार कान में तेल डालकर वेतन व आवंटन के बंरबांट करने में लगे रहते हैं। ऐसे में विभाग द्वारा जिला स्तर पर किए जा रहे कार्यों की जांच किसी सक्षम संस्था से कराना आवश्यक है।

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