
टंडवा (चतरा) पिछले सात महीने से मानदेय भुगतान की बाट जोह रहे प्रखंड क्षेत्र में कार्यरत मनरेगाकर्मी इन दिनों पूरी तरह से मायुस हैं। आर्थिक तंगी के बीच दशहरा महापर्व में आवश्यक जरुरतों को पूरा कर नहीं मना पाने की कसक मनरेगाकर्मियों में साफ छलक रही है। नाम नहीं छापने की शर्त पर अपना दर्द बयां करते हुवे एक रोजगार सेवक ने भारी मन से कहा कि अल्प मानदेय के बाद भी 80 से 100 किलोमीटर दूर जाकर काम करना एवं उसके बाद भी महीनों तक भुगतान लंबित रहने से उनके सामने स्थिति कितनी चुनौतिपूर्ण है इसका सहज अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। उधारी व कर्ज के बोझ में अबतक तो जैसे – तैसे गुजारा हो गया लेकिन पर्व त्यौहारों में मूलभूत सुविधाओं की पूर्ति के लिये कोई देगा इसकी कोई गारंटी नहीं है। बहरहाल, उक्त मामले में उपायुक्त से मनरेगाकर्मियों ने सहानुभूति पूर्वक संज्ञान लेने का आग्रह किया है। विदित हो कि पत्रांक 10259 दिनांक 13/11/2007 के माध्यम से झारखंड सरकार के तात्कालिक विशेष सचिव सह मनरेगा आयुक्त ने शैलेश कुमार सिंह ने जिले के सभी उपायुक्तों को पत्र भेजकर रोजगार सेवकों को गृह प्रखंडों में हीं नियुक्ति के निर्देश दिये थे।






















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