अंधविश्वास: ओझा-गुणी के आरोप में जघन्य हत्याकांड की जांच शुरू
टंडवा (चतरा) थाना क्षेत्र के ड़हु पंचायत के खूंटी टोला में पिछले दिनों मंगलवार को हुवे धर्मदेव उरांव के जघन्य हत्याकांड को लेकर स्थानीय पुलिस ने मृतक के पत्नी के बयान पर कांड़ संख्या 196/25 में छः नामजद समेत 40-45 अज्ञात लोगों के विरुद्ध आरोप गठित कर बारिकी से जांच शुरू कर दी है। इस मामले में गुरुवार को रांची से फाॉरेंसिक टीम घटनास्थल व श्मसान घाट से कई आवश्यक नमूने एकत्रित किये। प्राप्त जानकारी के अनुसार कांड में प्रयुक्त एक भी चाकू बरामद किया गया है जिसे आरोपियों ने मृतक का जीभ काटकर उसके घर में फेंक दिया था। वहीं श्मसान घाट से फुटप्रिंट, राख व हड्डियां संग्रहित की गई। दरअसल, हत्या के बाद साक्ष्य छिपाने के उद्देश्य से आरोपियों ने आधी रात में हीं दाह संस्कार कर दिया था।जांच के दौरान घटनास्थल पर एसडीपीओ प्रभात रंजन बरवार, थाना प्रभारी अनिल उरांव, एसआइ अमित कुमार, दिलेश्वर कुमार , सुनील कुमार समेत पुलिसकर्मी मौजूद थे।
बच्चा बीमार होने पर ओझा-गुणी के शक में हुई नृशंस हत्या
बताया जाता है कि घटना से दो दिन पूर्व आरोपियों के घर धर्मदेव शराब पीने के लिये गया था जहां नहीं मिलने से वो नाराज़ हो कर अपने घर लौट गया। संयोगवश आरोपी का बच्चा बीमार हो गया जिससे ओझा-गुणी के शक में संगठित होकर उग्र भीड़ ने पहले जीभ काटी फिर लगभग 6 घंटे बाद उसे घर से अगवा कर चौराहे में ले जाया गया जहां लाठी डंडे से पीट- पीट कर लोगों ने मार डाला। सूत्रों की मानें तो जल्लाद बनी भी पीड़ित को चीखते- चिल्लाते देखकर मोबाइल में वीडीओ बना रही थी। वहीं ड़़रे- सहमे परिजनों ने जीभ काटे जाने के बाद भी ना तो पुलिस को सूचना दी और ना हीं पीड़ित का समुचित उपचार कराया। लोगों का कहना है कि परिजनों ने हिम्मत दिखाई होती तो जान बचाया जा सकता था।बताया जाता है कि गुप्त सूचना पर घटनास्थल में देर रात पहुंचने से पहले हीं लोगों ने शव को जला दिया था।





















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