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टमाटर किसानों को विल्ट रोग से बचाने की पहल, उद्यान विभाग और प्रदान के बीच समझौता

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घाघरा और बसिया के 100 किसान परिवारों को मिलेगा ग्राफ्टेड टमाटर की खेती का प्रशिक्षण, दो साल तक चलेगी परियोजना

गुमला (झारखंड)। जिले के घाघरा और बसिया प्रखंड में टमाटर की फसल को विल्ट रोग से होने वाले नुकसान से बचाने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से जिला उद्यान विभाग तथा प्रदान (PRADAN) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके तहत ‘GROW—ग्राफ्टेड, रेजिलिएंट एवं ऑप्टिमाइज्ड वाटर-एफिशिएंट टमाटर खेती’ परियोजना संचालित की जाएगी।

समझौते पर जिला उद्यान विभाग की ओर से डॉ. तमन्ना प्रवीण और प्रदान, गुमला की ओर से मो. मेराज उद्दीन ने हस्ताक्षर किए। परियोजना के माध्यम से टमाटर उत्पादक क्षेत्रों में रोग का जोखिम कम करने और खेती की उन्नत तकनीकों को बढ़ावा देने की योजना है।

विल्ट रोग से प्रभावित हो रही टमाटर की खेती

घाघरा और बसिया प्रखंड लंबे समय से टमाटर उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र रहे हैं। यहां छोटे और सीमांत किसानों की आय का बड़ा हिस्सा टमाटर की खेती पर निर्भर है। हालांकि, विल्ट रोग के बार-बार प्रकोप और मिट्टी की बदलती स्थिति के कारण फसल को नुकसान पहुंच रहा है। इससे किसानों का पारंपरिक टमाटर उत्पादन के प्रति भरोसा भी प्रभावित हुआ है। इस समस्या के समाधान के लिए परियोजना के तहत ग्राफ्टेड टमाटर की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा। इस तकनीक में रोग-सहनशील बैंगन के मूलवृंत पर अच्छी उपज देने वाले टमाटर की कलम लगाई जाती है, ताकि रोग से होने वाले नुकसान का जोखिम कम करने में मदद मिल सके।

100 किसान परिवारों को मिलेगा लाभ

परियोजना घाघरा और बसिया प्रखंड के दो गांवों में संचालित होगी। इसके तहत कुल 100 किसान परिवारों को जोड़ने की योजना है। प्रत्येक परिवार को 30 डिसमिल क्षेत्र में मॉडल खेती के लिए लगभग 550 ग्राफ्टेड टमाटर पौधे उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।

उद्यान विभाग देगा प्रशासनिक सहयोग

समझौते के अनुसार, जिला उद्यान विभाग क्रियान्वयन में प्रशासनिक सहयोग करेगा। विभाग की ओर से एमआईडीएच (MIDH), आरकेवीवाई और एनएचएम जैसी चालू योजनाओं के साथ समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा। पात्र किसानों को ग्राफ्टेड पौधे, जैविक खाद, मल्चिंग और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने में भी सहायता की जाएगी। इसके अलावा ड्रिप सिंचाई की व्यवस्था के लिए संबंधित विभागों से समन्वय की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। विभाग के क्षेत्रीय कर्मी खेतों का निरीक्षण करेंगे और किसान दिवस तथा समीक्षा बैठकों में भाग लेंगे।

किसानों को खेतों में मिलेगा तकनीकी मार्गदर्शन

परियोजना के तहत प्रदान तकनीकी एजेंसी के रूप में किसानों को प्रशिक्षण और खेतों में व्यावहारिक मार्गदर्शन देगा। इसमें पौधों की देखभाल, रोपाई, पोषण प्रबंधन, रोग-कीट नियंत्रण, सिंचाई, मल्चिंग, कटाई-छंटाई और फसल कटाई के बाद के प्रबंधन की जानकारी शामिल होगी। संस्था किसानों को बाजार से जोड़ने और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के साथ समन्वय स्थापित करने में भी सहयोग करेगी। परियोजना के दौरान प्राप्त अनुभवों और परिणामों का दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा।

दो साल तक चलेगी परियोजना

यह समझौता दो वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा। इसमें टमाटर की पूरी फसल अवधि को शामिल किया गया है। किसानों को दोबारा फसल लेने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में फसल के महत्वपूर्ण चरणों पर समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। यह समझौता गैर-वित्तीय और सहयोगात्मक प्रकृति का है। इसके तहत किसी भी पक्ष पर प्रत्यक्ष आर्थिक दायित्व निर्धारित नहीं किया गया है।

दूसरे क्षेत्रों के लिए भी तैयार होगा मॉडल

परियोजना का मुख्य उद्देश्य विल्ट रोग से निपटने के प्रभावी उपायों को प्रदर्शित करना, उत्पादन जोखिम कम करना, किसानों की उपज और आय बढ़ाना तथा उनकी तकनीकी क्षमता मजबूत करना है। इसके साथ ही जिले के अन्य टमाटर उत्पादक क्षेत्रों में भी अपनाए जा सकने वाले क्लस्टर आधारित खेती मॉडल को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस अवसर पर उद्यान विभाग के तकनीकी विशेषज्ञ दीपक कुमार तथा प्रदान की ओर से जितेंद्र कुमार और रौशन उपस्थित थे।

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