Home बिहार झारखंड देश-विदेश मनोरंजन खेल क्राइम शिक्षा राजनीति हेल्थ राशिफल
---Advertisement---

बिना मान्यता के धड़ल्ले से चल रहे अनेक निजी स्कूल

---Advertisement---
WhatsApp Group Join Now

यू-डाइस कोड के बिना छात्रों का भविष्य अधर में, कार्रवाई की मांग तेज

मयूरहंड (चतरा): शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत विद्यालयों का पंजीकरण एवं यू-डाइस (UDISE) कोड अनिवार्य है, लेकिन मयूरहंड प्रखंड में नियमों की अनदेखी कर कई निजी विद्यालयों का संचालन किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अनेक स्कूल बिना सरकारी मान्यता और यू-डाइस कोड के संचालित हो रहे हैं, जिससे विद्यार्थियों का भविष्य संकट में पड़ सकता है।

जानकारी के अनुसार, कुछ निजी विद्यालय आवासीय भवनों में संचालित किए जा रहे हैं। वहीं, कई स्कूलों द्वारा कागजों पर खेल मैदान दिखाए जाने का भी आरोप है, जबकि संबंधित भूमि पर खेती की जा रही है। ऐसे में बच्चों के शारीरिक एवं सर्वांगीण विकास पर भी सवाल उठ रहे हैं।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यू-डाइस कोड के बिना किसी भी विद्यालय का डेटा सरकारी पोर्टल पर दर्ज नहीं हो सकता। ऐसे विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का रिकॉर्ड शिक्षा विभाग के डेटाबेस में उपलब्ध नहीं रहता। परिणामस्वरूप विद्यार्थियों की अपार आईडी (APAAR ID) बनने में भी परेशानी आ सकती है, जिससे भविष्य में उच्च शिक्षा, छात्रवृत्ति एवं अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना मान्यता वाले विद्यालयों के विरुद्ध कार्रवाई करने के बजाय संबंधित विभाग मूकदर्शक बना हुआ है। उनका कहना है कि अभिभावक बेहतर शिक्षा की उम्मीद में निजी विद्यालयों में मोटी फीस जमा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि विद्यालय की वैधानिक स्थिति क्या है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, जिन विद्यालयों के पास मान्यता एवं यू-डाइस कोड नहीं है, उनमें बच्चों का नामांकन कराने से बचना चाहिए। ऐसे विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भविष्य में कई प्रशासनिक एवं शैक्षणिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

प्रबुद्ध नागरिकों एवं अभिभावकों ने जिला शिक्षा विभाग से मांग की है कि प्रखंड के सभी निजी विद्यालयों की सूची सार्वजनिक की जाए, उनकी मान्यता एवं यू-डाइस कोड की जांच कराई जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment