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4 महीने का बनता था ₹62,000, मिले सिर्फ ₹30 हजार; मौखिक रूप से चाभी छीनकर किया गया था कार्यमुक्त

On: June 23, 2026 11:04 PM
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सदर अस्पताल में मानदेय घोटाला! पूर्व पर्यवेक्षक ने बकाया वेतन के लिए सिविल सर्जन व उपायुक्त से लगाई गुहार; मानसिक प्रताड़ना का आरोप

न्यूज स्केल लाइव ब्यूरो

देवघर। जिला सदर अस्पताल देवघर में आउटसोर्सिंग कंपनियों के बदलाव और कर्मियों के मानदेय भुगतान में विसंगति का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। सदर अस्पताल में पूर्व में कार्यरत आउटसोर्सिंग कंपनी ‘बालाजी डिटेक्टिव फोर्स’ के तहत पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) पद पर तैनात कर्मी रविंद्र कुमार ने अपने पिछले चार महीने के बकाया वेतन भुगतान की मांग को लेकर देवघर सिविल सर्जन (CS) को एक लिखित आवेदन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।

कंपनी बदली पर नहीं बदला कर्मी, मौखिक रूप से किया गया कार्यमुक्त

सिविल सर्जन को दिए गए आवेदन के माध्यम से भुक्तभोगी रविंद्र कुमार ने बताया कि विगत 31 दिसंबर 2025 को सदर अस्पताल देवघर में आउटसोर्सिंग कंपनी ‘बालाजी डिटेक्टिव फोर्स’ की सेवा समाप्त हो गई थी और उसके स्थान पर ‘समानता कंपनी’ ने कार्यभार संभाला था। कंपनी बदलने के बावजूद रविंद्र कुमार अनवरत 1 जनवरी 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक अस्पताल में पर्यवेक्षक के रूप में अपनी सेवाएं पूरी निष्ठा के साथ देते रहे।

परंतु, 30 अप्रैल को एकाएक प्रज्वल सिंह (पर्यवेक्षक) ने उनसे संपर्क किया और मौखिक रूप से कहा कि कंपनी ने आपको कार्यमुक्त (Terminated) कर दिया है। रविंद्र का आरोप है कि प्रज्वल सिंह ने बिना किसी लिखित नोटिस के उनसे कार्यालय की चाबियां ले लीं और आश्वासन दिया कि उनके चार महीने का पूरा मानदेय सीधे उनके बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

₹62 हजार के बदले मिले सिर्फ ₹30 हजार, हाजिरी का पन्ना भी संपुष्ट

आवेदन में रविंद्र कुमार ने वेतन का पूरा ब्योरा देते हुए बताया कि उन्हें प्रति माह ₹15,500 का मानदेय मिलता था। इस दर से उनके चार महीने (जनवरी से अप्रैल) के कार्यकाल का कुल मानदेय ₹62,000 बनता है। परंतु, कंपनी के अधिकारियों द्वारा उनके खाते में सिर्फ ₹30,000 भेजे गए और शेष ₹32,000 का बकाया आज तक रोके रखा गया है।

अपने दावों को पुख्ता करने के लिए पीड़ित कर्मी रविंद्र कुमार ने सिविल सर्जन के समक्ष अपने चार महीने के सेवाकाल के दौरान उपस्थिति पत्रक (हाजिरी रजिस्टर के खाते का पन्ना) भी आवेदन के साथ संलग्न किया है, जो प्रमाणित करता है कि उन्होंने अस्पताल में नियमित कार्य किया था।

कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर, उपायुक्त (DC) को भी भेजी प्रतिलिपि

पीड़ित रविंद्र कुमार ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि अपने ही खून-पसीने की कमाई के बकाये पैसे की मांग को लेकर वे पिछले कई हफ्तों से लगातार संबंधित अधिकारियों और कंपनी के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन पैसे देने के बजाय उन्हें प्रबंधन द्वारा सिर्फ और सिर्फ मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

थक-हारकर उन्होंने देवघर सिविल सर्जन से मामले में हस्तक्षेप करते हुए बकाया मानदेय का अविलंब भुगतान कराने का आग्रह किया है। इसके साथ ही इस गंभीर मामले की एक प्रतिलिपि उपायुक्त (DC) देवघर को भी उचित और दंडात्मक कार्रवाई हेतु समर्पित की है। इस शिकायत के बाद अब स्वास्थ्य महकमे में आउटसोर्सिंग कंपनियों की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।

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