जिला बाल संरक्षण इकाई में कार्यशाला; मुक्त कराए गए बच्चों से शोषणकारी परिस्थितियों में लिया जा रहा था काम; की प्रक्रिया शुरू
न्यूज स्केल लाइव
चतरा: विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर चतरा जिले में बाल अधिकारों की सुरक्षा और बाल श्रम के पूर्ण उन्मूलन को लेकर जिला प्रशासन एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के कड़े संयुक्त तालमेल से एक बहुत बड़ी विधिक सफलता हाथ लगी है। बाल अधिकारों के क्षेत्र में कार्यरत प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संगठन ‘जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन’ की मजबूत सहयोगी संस्था ‘लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान’ (LGSS), जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) और चतरा पुलिस के विधिक सहयोग से जिले के विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में औचक छापेमारी कर 13 मासूम बच्चों को बाल मजदूरी के क्रूर दलदल से सुरक्षित मुक्त करा लिया गया है।
इस बड़ी और कड़क प्रशासनिक कार्रवाई के बाद चतरा, टंडवा और हंटरगंज के उन होटल, ढाबा और गैरेज संचालकों के बीच भारी हड़कंप मच गया है, जो विधिक नियमों को ताक पर रखकर बच्चों का आर्थिक शोषण कर रहे थे। इस बड़ी विमुक्ति के बाद जिला बाल संरक्षण इकाई चतरा के मुख्य सभागार में जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी (DCPO) अरुणा प्रसाद की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय विधिक कार्यशाला सह समीक्षा बैठक का भी आयोजन किया गया।
14 से 17 वर्ष के बीच है मुक्त कराए गए किशोरों की उम्र, बेहद भयावह और शोषित थीं परिस्थितियां
कार्यशाला के दौरान लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान के पदाधिकारियों ने विमुक्त कराए गए बच्चों की अद्यतन विधिक स्थिति की तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि मुक्त कराए गए सभी 13 बच्चों की उम्र 14 से 17 वर्ष के बीच है। ये सभी किशोर जिले के विभिन्न होटलों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, गैरेज और छोटी फैक्ट्रियों में कड़े श्रम कार्य में झोंके गए थे।
प्रशासनिक और विधिक टीम द्वारा की गई प्रारंभिक विधिक जांच और काउंसिलिंग में यह बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली बात सामने आई है कि इन बच्चों से बेहद अमानवीय, दमनकारी और गंभीर शोषणकारी परिस्थितियों में दिन-रात काम कराया जा रहा था। उन्हें तय विधिक न्यूनतम मजदूरी से भी कम पैसे दिए जा रहे थे। संस्थान ने बताया कि बच्चों को इस नरक से सुरक्षित मुक्त कराने के बाद, कड़ा रुख अख्तियार करते हुए श्रम कानूनों का उल्लंघन करने वाले जिम्मेदार प्रतिष्ठान स्वामियों और नियोक्ताओं के खिलाफ संबंधित थानों में बाल श्रम निषेध अधिनियम एवं जेजे एक्ट (JJ Act) के तहत नामजद कानूनी कार्रवाई व प्राथमिकी दर्ज करने की विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

बच्चों की जगह ढाबों और फैक्ट्रियों में नहीं, बल्कि स्कूल की कक्षाओं में है: विकास गुप्ता
कार्यशाला को कड़े तेवर के साथ संबोधित करते हुए लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान के जिला समन्वयक विकास कुमार गुप्ता ने दो टूक शब्दों में कहा:
“बाल श्रम और बाल तस्करी मासूम बच्चों के स्वर्णिम बचपन, उनकी मुस्कान और उनके मौलिक विधिक अधिकारों को सरेआम छीनने का एक घिनौना कृत्य है। हम पूरे समाज को यह कड़ा संदेश देना चाहते हैं कि देश के बच्चों की असली जगह कोयला खदानों, होटलों, ढाबों और फैक्ट्रियों के कमरों में नहीं है, बल्कि स्कूल की आधुनिक कक्षाओं और खेल के मैदानों में है। चतरा जिले से बाल तस्करी और बाल मजदूरी के इस अभिशाप को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस महकमे के साथ हमारा कड़ा और सघन विधिक समन्वय भविष्य में भी इसी तरह लगातार जारी रहेगा।”
विमुक्त बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ेगी सीडब्ल्यूसी, पुनर्वास की विधिक प्रक्रिया तेज
बैठक में उपस्थित चतरा जिला बाल कल्याण समिति (CWC) के अध्यक्ष नर्मदेश्वर सिंह एवं जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी अरुणा प्रसाद ने संयुक्त रूप से बताया कि मुक्त कराए गए सभी 13 बच्चों को विधिक रूप से बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। समिति के आदेशानुसार सभी बच्चों को सुरक्षित आश्रय गृह (शेल्टर होम) भेजा जा रहा है, जहाँ उन्हें तात्कालिक पुनर्वास, निःशुल्क चिकित्सा, विधिक सहायता, काउंसिलिंग और अन्य आवश्यक सरकारी सुविधाएं उपलब्ध कराने की विधिक प्रक्रिया कड़ाई से जारी है। समाज में उनके पुनर्वास के लिए उनके कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) की भी मुकम्मल व्यवस्था की जाएगी।
हाई-लेवल विधिक कार्यशाला के दौरान ये मुख्य अधिकारी रहे उपस्थित
विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर आयोजित इस कड़क और अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यशाला के मौके पर मुख्य रूप से: जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी अरुणा प्रसाद, बाल कल्याण समिति (CWC) के अध्यक्ष नर्मदेश्वर सिंह, जिला निरीक्षण समिति के सदस्य महावीर साव, चतरा जिले के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी (LEO)
भारत सरकार के चाइल्ड हेल्पलाइन (Child Helpline 1098) के जिला समन्वयक एवं विशिष्ट तकनीकी प्रतिनिधि सहित लोहरदगा ग्राम स्वराज्य संस्थान के कई कर्मठ सामाजिक कार्यकर्ता और जिला बाल संरक्षण इकाई के विधिक कर्मी मुख्य रूप से उपस्थित थे। सभी अधिकारियों ने एक सुर में चतरा को पूर्णतः ‘बाल श्रम मुक्त जिला’ बनाने का कड़ा विधिक संकल्प लिया।





















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