लोहरदगा। कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता व युवा समाजसेवी रामाधार पाठक ने बढ़ती ईंधन कीमतों और संभावित आपूर्ति संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता प्रभावित हो रही है, तो सरकार को केवल बचत की अपील करने के बजाय धरातल पर व्यावहारिक और जनहितकारी विकल्प उपलब्ध कराने चाहिए।
रामाधार पाठक ने संकट के समाधान और आम जनता को राहत देने के लिए सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे हैं:
न्यूनतम या निशुल्क हो सरकारी बसों का किराया
उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसी स्थिति में कुछ समय के लिए सरकारी बसों का किराया न्यूनतम अथवा पूरी तरह निशुल्क किया जाना चाहिए। इससे अधिक से अधिक लोग निजी वाहनों को छोड़कर सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करेंगे, जिससे ईंधन की खपत में कमी आएगी, सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव घटेगा और आम नागरिकों को कमरतोड़ महंगाई से सीधी राहत मिलेगी।
प्रमुख शहरों में चलें विशेष बसें
श्री पाठक ने कहा कि बड़े शहरों एवं औद्योगिक क्षेत्रों में विशेष बस सेवाएं चलाई जानी चाहिए। कार्यालय समय (Office Hours) के दौरान अतिरिक्त सरकारी बसों की व्यवस्था की जाए, ताकि सड़कों पर निजी वाहनों की संख्या को कम किया जा सके। एक मजबूत सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था न केवल ईंधन की बचत करेगी, बल्कि प्रदूषण और यातायात अव्यवस्था को नियंत्रित करने में भी मील का पत्थर साबित होगी।
’वर्क फ्रॉम होम’ को मिले प्राथमिकता
प्रेस विज्ञप्ति में उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि जिन विभागों, निजी संस्थानों एवं कंपनियों में कार्य की प्रकृति अनुकूल हो, वहां “वर्क फ्रॉम होम” (घर से काम) की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। आईटी, बैंकिंग, निजी कार्यालयों और ऑनलाइन सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में यह व्यवस्था बेहद प्रभावी साबित हो सकती है। इससे प्रतिदिन लाखों वाहनों की आवाजाही रुकेगी, जिससे ईंधन की बचत के साथ-साथ कर्मचारियों के समय और पैसे दोनों की बचत होगी।
कार पूलिंग और ई-बसों को बढ़ावा देने की मांग
युवा नेता ने सरकार से ई-बसों, साझा परिवहन व्यवस्था और कार पूलिंग जैसी आधुनिक योजनाओं को प्रोत्साहित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि विद्यालयों, कार्यालयों और बड़े संस्थानों में सामूहिक परिवहन नीति लागू कर ईंधन संरक्षण के बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
”वर्तमान समय में आवश्यकता केवल प्रतिबंध लगाने की नहीं, बल्कि ऐसी दूरदर्शी व्यवस्था विकसित करने की है जिससे आम नागरिकों को सुविधा भी मिले और राष्ट्रीय संसाधनों की बचत भी सुनिश्चित हो।”
— रामाधार पाठक, युवा नेता सह समाजसेवी





















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