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सुंदरी देवी सरस्वती शिशु मंदिर में तीन दिवसीय शैक्षणिक कार्यशाला संपन्न: शिक्षा की गुणवत्ता और ‘पंचपदी’ पद्धति पर रहा जोर

On: April 1, 2026 7:32 PM
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लोहरदगा: सुंदरी देवी सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित तीन दिवसीय आचार्य कार्यशाला का सफल समापन हुआ। कार्यक्रम के अंतिम दिन शिक्षकों को नवीन शैक्षणिक तकनीकों और ‘शिशु वाटिका’ के सुदृढ़ीकरण के लिए प्रशिक्षित किया गया।

​प्रथम सत्र में मार्गदर्शन और नियोजन हुआ

​कार्यशाला का शुभारंभ संयुक्त सत्र के रूप में हुआ, जिसमें झारखंड के प्रांतीय संघचालक सच्चिदानंद अग्रवाल का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। प्रधानाचार्य सुरेश चंद्र पांडे ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए ‘शून्य कलांस’के महत्व और पंजी लेखन के सत्यापन पर जोर दिया। प्रथम दिन प्रांतीय कार्य योजना एवं आगामी शैक्षणिक पंचांग का निर्माण किया गया।

​द्वितीय दिन नवीन तकनीक और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP)

​दूसरे दिन के सत्रों में आधुनिक शिक्षा पद्धतियों पर चर्चा हुई। रवि रंजन उपाध्याय ने नवीन शैक्षणिक तकनीक और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से प्रकाश डाला। विद्यालय समिति के अध्यक्ष शशिधर लाल अग्रवाल ने भारतीय शिक्षा की ‘पंचपदी पद्धति’ (अधीति, बोध, अभ्यास, प्रयोग और प्रसार) की प्रासंगिकता समझाई। वहीं, विभाग निरीक्षक ओमप्रकाश सिन्हा ने शिशु वाटिका और नियमित गृह कार्य निरीक्षण के महत्व को रेखांकित किया।

​तीसरा दिन: TLM और क्रियात्मक अभ्यास

​समापन दिवस पर शिक्षकों को TLM (Teaching Learning Material) और TLE (Teaching Learning Equipment) के निर्माण एवं प्रयोग का अभ्यास कराया गया आचार्य बंधु-भगिनी द्वारा शिशु वाटिका को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियों का प्रदर्शन किया गया।

​ सचिव अजय प्रसाद ने विद्यालय की भौतिक पंजी का निरीक्षण किया। श्रीमती सुनीता कुमारी ने शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों की भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की।

 

​इस अवसर पर विभाग प्रमुख ओमप्रकाश सिन्हा, अध्यक्ष शशिधर लाल अग्रवाल, उपाध्यक्ष विनोद राय, सचिव अजय प्रसाद, प्रांतीय संघचालक सच्चिदानंद अग्रवाल और प्रधानाचार्य सुरेश चंद्र पांडे मुख्य रूप से उपस्थित थे।

​कार्यशाला को सफल बनाने में आचार्य प्रमोद कुमार साहू, महेंद्र कुमार मिश्र, अशोक कुमार सिंह, रवि रंजन उपाध्याय, सुनीता कुमारी, लक्ष्मी देवी, दीपिका सिंह, आकांक्षा सिंह, श्वेता सोनी, पिंकी जयसवाल और विद्यालय के सभी सहयोगी कर्मियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

 

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