टंडवा के कई गांवों में वनाधिकार समिति का नहीं हो सका पुर्नगठन
टंडवा(चतरा)। मंगलवार को टंडवा प्रखंड क्षेत्र के कई गांवों में वनाधिकार समिति का गठन नहीं हो सका।इसका कारण कहीं समुचित प्रचार-प्रसार का आभाव तो कहीं नियुक्त पर्यवेक्षकों का स-समय नहीं पहुंचने का कारण बताया जा रहा है। ज्ञात हो कि उपायुक्त के ज्ञापांक 1036 दिनांक 16/10/2023 के आलोक में प्रखंड कार्यालय से सोमवार को हीं पत्र जारी कर महज चौबीस घंटे के अंदर 96 गांवों में एक साथ वनाधिकार समिति के गठन की तैयारी की गई थी। हालांकि, मंगलवार दोपहर 3 बजे तक कसियाडीह, नावाडीह, सेरनदाग, बिंगलात, घाघरा, कुडलौंगा, मासिलौंग, सनहा, राहम समेत दर्जनों गांवों में समिति के गठन नहीं होने की सूचना है। कसियाडीह पंचायत के ग्रामीणों ने बताया कि वे पर्यवेक्षकों की बाट काफी देर तक जोहते रहे। वहीं पंसस राजेश चौधरी ने बताया कि अल्प समय में बगैर समुचित प्रचार-प्रसार कराये एफआरए समिति के गठन का प्रयास पूरी तरह से संदेहास्पद है। वहीं सांसद प्रतिनिधि रमेश राणा ने कहा कि जिला प्रशासन ग्रामीणों के बीच समुचित प्रचार-प्रसार हेतु न्यूनतम एक सप्ताह का समयांतराल रखकर तिथि का निर्धारण करे जिससे गठन निर्विरोध व पारदर्शी हो सके। क्षेत्र के लोगों की मानें तो लगभग 15 वर्षों के बाद वनाधिकार समिति के पुर्नगठन हेतु जिला प्रशासन ने पहल किया है। राहम पंचायत से उपेन्द्र पांडेय ने बताया कि मुखिया ने बैठक स्थगित होने की बातें लोगों से कही है। जबकि सनहा के अशोक महतो ने बताया कि कुछ लोगों द्वारा गुपचुप तरीके से समिति गठन किया गया, जिसकी शिकायत बीडीओ से की गई है। नव गठित वनाधिकार समिति के माध्यम से जहां नवागंतुक कई परियोजनाओं को वन अनापत्ति प्रकिया पारदर्शी तरीके से क्रियान्वयन कराया जा सकेगा वहीं भूमिहीनों को वनपट्टा उपलब्ध कराने में भी प्रशासन को काफ़ी सहुलियत होगी।




















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