प्रतापपुर (चतरा)। प्रतापपुर प्रखंड मुख्यालय में वर्ष 2004 में लाखों रुपये की लागत से स्थापित बीएसएनएल टावर और कार्यालय आज खंडहर बनकर खड़ा है। यह वही टावर है जिसे लेकर गरीब और मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं ने सस्ती मोबाइल सेवा की उम्मीद की थी, लेकिन 21 साल बाद हकीकत यह है कि पूरा कार्यालय जर्जर हो चुका है और टावर पर बेल-झाड़ियां चढ़ चुकी हैं। सबसे गंभीर स्थिति यह है कि टावर पर बेल-पत्तों के बीच से पावर केबल गुजर रहा है। किसी भी दिन शॉर्ट सर्किट हुआ तो करोड़ों का नुकसान होना तय है। स्थिति ऐसी है कि कार्यालय की हालत किसी भूत बंगले से कम नहीं। चारों ओर गंदगी, टूटी खिड़कियां, टपकती दीवारें और लाखों का जेनरेटर कबाड़ बन चुका है। मशीनों को ठंडा रखने के लिए जहां एसी लगना चाहिए था, वहां पंखा तक नहीं है। लोगों का कहना है कि जब जिओ और एयरटेल जैसी कंपनियां गांव-गांव तक नेटवर्क पहुंचा चुकी हैं, तो बीएसएनएल क्यों खुद को गर्त में धकेल रहा है? करोड़ों रुपए की जनता की गाढ़ी कमाई से बना यह टावर आखिर किसकी लापरवाही से बरबाद हो रहा है? विभागीय अधिकारी अब तक चुप क्यों बैठे हैं? ग्रामीणों का साफ कहना है कि अगर बीएसएनएल की 4 जी-5 जी सेवा बहाल कर दी जाए तो लोग निजी कंपनियों के महंगे रिचार्ज से राहत पा सकते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी अब भी जागेंगे, या यह टावर पूरी तरह कब्रिस्तान में तब्दील होकर इतिहास बन जाएगा? प्रतापपुर में बीएसएनएल नेटवर्क की खराब स्थिति को लेकर उपभोक्ताओं और व्यावसायिक संगठनों ने नाराजगी जताई है। व्यावसायिक संघ अध्यक्ष गौतम कुमार व डीलर संघ अध्यक्ष संजय गुप्ता ने कहा कि बीएसएनएल सेवा में सुधार होने और लोगों को सेवा उपलब्ध कराने की जरूरत है। यदि ऐसा होता है तो लोगों को नेटवर्क की सस्ती सुविधा मिल पाएगी और महंगे रिचार्ज कराने से राहत मिलेगी। प्रीमियर अकैडमी के डायरेक्टर शाहनवाज खान और प्रज्ञा केंद्र संचालक रवि कुमार ने कहा कि नेटवर्क इतना कमजोर है कि वाई-फाई बंद करना पड़ा, कंप्लेंट करने के बाद भी कोई सुधार के असार नहीं दिखते। जबकि रवि कुमार ने कहा कि नेटवर्क की सुविधा तो रहती है लेकिन यह सुविधा तभी तक है जब तक बिजली है। बिजली गुल होते ही 4 जी-5जी सेवा भी ठप हो जाती है। लोगों ने नेटवर्क और व्यवस्था में सुधार की मांग की है।