झारखण्ड/गुमला -जिला कांग्रेस कमेटी के जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में हमारे देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री की जयंती गुमला इंडोर स्टेडियम महात्मा गांधी पार्क में एवं लाल बहादुर शास्त्री के प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन फूल अर्पित करते हुए जयंती मनाई गई मौके पर जिला अध्यक्ष चैतु उरॉव ने कहा कि भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और राजनेता महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। गांधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। देश के लोगों ने उन्हें बापू कहकर पुकारा । महात्मा गांधी के बलिदान और देश को आजादी कराने में उनके बेहद महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रपिता का ओहदा दिया गया है। गांधी जी ने न सिर्फ देश के लिए आजादी की लड़ाई लड़ी, बल्कि समाज सुधार के कार्य भी किए।दुनिया के महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने गांधी जी के बारे में कहा था कि “भविष्य में आने वाली पीढ़ियों को इस बात पर विश्वास करने में मुश्किल होगी कि कोई व्यक्ति भी कभी धरती पर आया था। उसी करिश्माई नेतृत्व एवं शानदार व्यक्तित्व वाले, महान स्वतंत्रता सेनानी और 19वीं सदी के सबसे सम्मानित राजनेता महात्मा गांधी की जयंती में पूरा देश महात्मा गांधी की जयंती पर उन्हें नमन कर श्रद्धांजलि दे रहा है। आजादी में उनके संघर्ष को याद कर रहा है। हम सब भी यहां गांधी जयंती के अति महत्वपूर्ण दिवस के अवसर पर एकत्रित हुए है। मैं भी गांधी को नमन करता हूं और उन्हें श्रद्धांजलि देता हूं।
महात्मा गांधी की ताकत सत्य और अहिंसा के सिद्धांत थे। सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलकर उन्होंने आजादी की लड़ाई में कई आंदोलन किए आऔर अंग्रेजो को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया। उनके चंपारण सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन, दांडी सत्याग्रह, भारत छोड़ा आंदोलन ने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव कमजोर करने में बड़ा रोल अदा किया।गांधी जी के पास अद्भुत नेतृत्व क्षमता थी। गांधी जी ने विचारों ने भारत के देशभक्तों की दो पीढ़ियों को प्रेरित किया, नतीजतन लोग आजादी की लड़ाई से जुड़ते रहे। उन्होंने अपने प्रभावशाली व्यक्तित्व व विचारों से स्वतंत्रता आंदोलन को जबरदस्त धार दी। गांधी जी समाज में फैली बुराइयों जैसे छुआछूत, शराब, जातीय भेदभाव, असमानता, महिलाओं के साथ भेदभाव के भी घोर विरोधी थी। उन्होंने सिर्फ आजादी की ही लड़ाई नहीं लड़ी बल्कि समाज में दलितों की स्थिति बेहतर करने व उन्हें बराबरी का हक दिलाने के लिए भी लड़ाई लड़ी। दलित आंदोलन किया। छुआछूत के खिलाफ जबरदस्त आवाज उठाई।लाल शास्त्री शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को हुआ था, यह तो हम सभी जानते हैं कि 2 अक्टूबर को लोकतंत्र जयंती का कार्यक्रम देश भर में बहुत ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। लेकिन 2 अक्टूबर का यह दिन हमारे देश के दो महापुरुषों को समर्पित है। इस दिन सिर्फ मूर्तिमान जी की ही नहीं लाल शास्त्री जी की भी जयंती मनाई जाती है। इस दिन लोग वास्तुशास्त्री जी के विचारों के साथ शास्त्री जी के प्रेम और त्याग को भी याद करते हैं। 2 अक्टूबर का यह विशेष दिन हमारे देश के दो महान नेताओं को समर्पित है, जो हम करोड़ों भारतीयों के प्रेरणा स्रोत हैं।लाल बहादुर शास्त्री अपने समय में देश के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक थे। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी जी के नेतृत्व में भी भाग लिया था। वह सदैव जी के सत्य और अहिंसा की कंपनियों का पालन करते रहे। आज़ादी के बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण राजनीतिक पदों पर कब्ज़ा किया, इस दौरान उनकी विश्वसनीयता और कर्तव्यनिष्ठा के लिए लोगों ने हमेशा उनकी प्रशंसा की । मौके पर वरिष्ठ कांग्रेसी आशिक अंसारी, विचार प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष खुदी भगत दुखी,जिला उपाध्यक्ष विष्णु राम,जिला महासचिव राजू कुमार महतो, फिरोज आलम , खालिद साह, रामनिवास प्रसाद, हांदु भगत, भैया राम उरांव,सदन प्रखंड अध्यक्ष गुलाम सरवर सचिव तरुण गोप,मोहम्मद शदाब, इबरार अंसारी , अरुण गुप्ता,महावीर सिंह, सुरेंद्र सिंह, अजीत टोपनो, शंभू नाथ सिंह ,गुड्डू, मोहम्मद राजन ,बिरशु सिंह ,मधुसूदन सिंह, बहादुर सिंह, रामप्रसाद सिंह, दीनानाथ सिंह ,जुगनू सिंह , काफी संख्या में कांग्रेसी कार्यकर्ता उपस्थित थे।
गुमला जिला कांग्रेस अध्यक्ष चैतू उरांव के नेतृत्व में इंडोर स्टेडियम पार्क में गांधी जी एवं लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई
By Ajay Sharma
On: October 2, 2023 12:40 PM
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