निर्धारित लागत से कम दरों पर डाले जा रहे जिले में टेंडर, कैसे होगा गुणवतापूर्ण कार्य
मयूरहंड(चतरा) जिले में विकास कार्यों को क्रियान्वयन के लिए टेंडर आमंत्रित की जा रही है।जिसमें संबंधित विभाग द्वारा निर्धारित लागत से कम दरों में टेंडर डालने वाले एजेंसियों व संवेदकों को कार्य निष्पादन की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। कुछ टेंडर तो 48 से 50 फीसदी तक कम में डाले जा रहे हैं। ऐसे में विकास कार्य कैसे होंगे, इसका जवाब संबंधित विभाग के अधिकारियों के पास भी नहीं है। कहते हैं कि जब से बीजेपी सरकार सत्ता में आई है, तब से सरकारी कार्यों पर सीधी निगरानी हो रही है, लेकिन जिले में संबंधित विभाग की कहानी कुछ और ही है।जिले में ग्रामीण विकास विभाग, पीएचईडी, जिला परिषद, लघु सिचाई विभाग के अलावा अन्य विभाग में टेंडर निकाले जा रहे हैं, लेकिन निर्धारित दर से कम टेंडर डालकर काम हासिल किया जा रहा है। नाम न लिखने की शर्त पर टेंडर से जुड़े लोगों का कहना है कि अभियंताओं की मिली भगत से टेंडर निर्धारित लागत से कम डाले जा रहे हैं। कई जेई कुछ एजेंसियों व संवेदको के साथ सांठ-गांठ करके कम दरों पर टेंडर डलवा रहे हैं और बाद में अपने हिसाब से भुगतान करवा लेते हैं। सूत्रों की मानें तो 48 फीसदी कम के टेंडर का विकास कार्य किया ही नहीं जा सकता, क्योंकि पिछले एक साल का इंडेक्स देखें तो हर चीज की कीमत में वृद्धि हुई, लेकिन टेंडर पर डाली जाने वाली राशि कम होती जा रही है। उदाहरण के तौर पर मान लीजिए विभाग 100 रुपए का टेंडर किसी विकास कार्य के लिए निर्धारित करता है तो उसे कंपनी 48 रुपए कम करके यानी 52 रुपए में करने को तैयार हो रही है। इसे और तोड़कर समझा जाएं तो 52 रुपए में विकास कार्य होगा, जिसमें 18 फीसदी जीएसटी देना होगा। इसके अलावा लेबर से लेकर सामग्री की खरीदारी से लेकर कंपनी का मुनाफा भी जुड़ा होगा। ऐसे में गुणवत्ता से समझौता किए बिना कार्यों को निस्तारित नहीं किया जा सकता। परिणाम स्वरुप कार्य निस्तारित होने के साथ उपयोग के लायक नहीं बच रहा या संवेदक आधा अधूरा कार्य छोड़ भाग जा रहे हैं। जिसका खामियाजा भुगतना जनता को पड रहा।

















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