बिशप स्वामी आनंद जोजो के सान्निध्य में 2000 श्रद्धालुओं ने की सामूहिक प्रार्थना, मानवता की सेवा को बताया धार्मिक आस्था की सार्थकता
चतरा। चतरा के ऐतिहासिक संत टेरेसा चर्च की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में स्वर्ण जयंती समारोह का भव्य आयोजन श्रद्धा, उल्लास और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। वर्ष 1976 में स्थापित संत टेरेसा चर्च ने सेवा, शिक्षा, प्रेम, करुणा और मानवता के क्षेत्र में अपनी पांच दशक की गौरवशाली यात्रा पूरी की।
स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय बिशप स्वामी आनंद जोजो उपस्थित रहे। उनके सान्निध्य में आयोजित विशेष प्रार्थना एवं धार्मिक कार्यक्रम में लगभग 2000 धार्मिक भाई-बहनों ने भाग लिया। दूर-दराज के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या ने समारोह को ऐतिहासिक और भव्य स्वरूप प्रदान किया।
समारोह की शुरुआत विशेष प्रार्थना एवं धार्मिक अनुष्ठान के साथ हुई। पूरे चर्च परिसर में दिनभर भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से प्रार्थना कर चर्च की निरंतर प्रगति, समाज में शांति, प्रेम और भाईचारे तथा मानव कल्याण की कामना की। इस अवसर पर संत टेरेसा चर्च की 50 वर्षों की यात्रा को याद किया गया और चर्च से जुड़े पुराने सदस्यों, धार्मिक सेवकों एवं समाज के सहयोगियों के योगदान को स्मरण करते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई।
मुख्य अतिथि बिशप स्वामी आनंद जोजो ने अपने संदेश में स्वर्ण जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पांच दशकों की यात्रा किसी भी संस्था के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था तभी सार्थक होती है, जब वह मानवता की सेवा और समाज में प्रेम एवं शांति स्थापित करने का माध्यम बने। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से आपसी प्रेम, भाईचारा, सद्भाव और जरूरतमंदों की सहायता को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया तथा कहा कि आने वाली पीढ़ियों को भी सेवा और मानवीय मूल्यों की परंपरा से जोड़ना आवश्यक है।
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि पांच दशक केवल समय की गणना नहीं, बल्कि विश्वास, समर्पण और सेवा की एक लंबी यात्रा का प्रतीक हैं। संत टेरेसा चर्च ने अपने कार्यों के माध्यम से लोगों को प्रेम, करुणा, शांति और परस्पर सहयोग का संदेश देने का प्रयास किया है।
समारोह के दौरान उपस्थित लोगों ने चर्च की स्वर्णिम यात्रा को याद करते हुए इसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की तथा आने वाले वर्षों में भी प्रेम, सेवा, शिक्षा, करुणा और सामाजिक सद्भाव के कार्यों को और मजबूती से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
स्वर्ण जयंती समारोह ने चतरा के धार्मिक एवं सामाजिक जीवन में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ा। 1976 से शुरू हुई संत टेरेसा चर्च की यह यात्रा विश्वास और सेवा की उस परंपरा का उत्सव रही, जिसने अनेक लोगों को मानवता और परोपकार की राह पर चलने की प्रेरणा दी।




















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