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यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज में बैंक शाखा के लिए जगह आवंटन पर उठे सवाल

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एकमात्र बैंक के प्रस्ताव पर आवंटन का दावा, विज्ञापन से लेकर चयन प्रक्रिया तक पारदर्शिता पर उठाए गए प्रश्न

हजारीबाग, संवाददाता। विनोबा भावे विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी लॉ कॉलेज में बैंक शाखा अथवा एक्सटेंशन काउंटर स्थापित करने के लिए करीब 1,073 वर्गफीट स्थान किराये पर देने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। कॉलेज की ओर से जारी विज्ञापन Memo No. VBU/ULC/R/1517/2025, दिनांक 12 जून 2025 के माध्यम से राष्ट्रीयकृत एवं अनुसूचित बैंकों से प्रस्ताव आमंत्रित किए गए थे।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस प्रक्रिया में केवल एक बैंक ने प्रस्ताव प्रस्तुत किया और उसी बैंक को स्थान आवंटित कर दिया गया। इसको लेकर यह सवाल उठाया जा रहा है कि विज्ञापन का पर्याप्त प्रचार-प्रसार हुआ था या नहीं और प्रस्ताव आमंत्रित करने एवं चयन की प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा के लिए पर्याप्त अवसर मिला या नहीं।

अन्य निविदाओं को लेकर भी उठ रहे सवाल

मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि विश्वविद्यालय की बॉयज हॉस्टल फर्नीचर खरीद से संबंधित निविदा प्रक्रिया पहले विवादों में रहने की बात कही जा रही है। वहीं दूसरी ओर सुरक्षा गार्ड/मैनपावर से संबंधित निविदा लंबे समय से लंबित होने का दावा किया जा रहा है।

अलग-अलग निविदाओं में निर्णय की गति और प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच विश्वविद्यालय की खरीद एवं निविदा व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, इन प्रक्रियाओं में नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं, यह संबंधित दस्तावेजों और सक्षम स्तर की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा।

स्वतंत्र जांच की मांग

इस मामले को लेकर चंदन सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय की निविदा प्रक्रिया में यह स्पष्ट होना चाहिए कि “किसके लिए प्रक्रिया तेज और किसके लिए लंबित” है। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान में निविदा प्रक्रिया का आधार पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और निर्धारित नियम होना चाहिए।

चंदन सिंह ने राज्यपाल-सह-कुलाधिपति से बैंक को स्थान आवंटित करने से जुड़े सभी दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच कराने के साथ-साथ बॉयज हॉस्टल फर्नीचर खरीद और लंबित सुरक्षा गार्ड/मैनपावर निविदा की भी समीक्षा कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच में यदि किसी स्तर पर निर्धारित नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

नोट: बैंक आवंटन में नियमों के उल्लंघन अथवा किसी पक्ष को लाभ पहुंचाने की बात अभी आरोप/आशंका के स्तर पर है; इसकी पुष्टि संबंधित अभिलेखों और आधिकारिक जांच से ही होगी।

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