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लोहरदगा के प्राचीन देवी मंदिर में 24 घंटे का अखंड हरिकीर्तन शुरू, हरिनाम संकीर्तन से भक्तिमय हुआ मंदिर परिसर।

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प्राचीन देवी मंदिर में 24 घंटे का अखंड हरिकीर्तन शुरू, हरिनाम संकीर्तन से भक्तिमय हुआ मंदिर परिसर।

लोहरदगा शहर के बरवा टोली अग्रसेन पथ स्थित श्री श्री प्राचीन देवी मंदिर में सोमवार की सुबह 11 बजे से हरिनाम संकीर्तन की ऐसी धारा बही कि पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। झाल-मंजीरों की गूंज, भक्ति गीतों के स्वर और भगवान के नाम के जयकारों के बीच 24 घंटे के अखंड हरिकीर्तन की शुरुआत हुई। हर वर्ष की परंपरा के अनुसार इस वर्ष भी अखंड हरिकीर्तन का आयोजन किया गया है। विधिवत पूजा-अर्चना के बाद शुरू हुए हरिकीर्तन के साथ ही मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण दिखाई देने लगा। हरिकीर्तन में जैसे-जैसे भगवान के नाम का संकीर्तन आगे बढ़ा, वैसे-वैसे श्रद्धालु भी इससे जुड़ते चले गए। मंदिर परिसर में कहीं श्रद्धालु हरिकीर्तन में बैठकर भगवान का नाम जपते नजर आए तो कहीं लोग पूजा-अर्चना कर मन की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते दिखे। हरिनाम संकीर्तन की स्वर लहरियों के बीच कुछ देर मंदिर परिसर में बैठना ही श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभूति का अवसर बन रहा था।सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। शहर और आसपास के क्षेत्रों से लोग मंदिर पहुंचे और अखंड हरिकीर्तन में अपनी सहभागिता निभाई। श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही से मंदिर परिसर में चहल-पहल बनी रही। आयोजन को लेकर स्थानीय लोगों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। हरिकीर्तन के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और आस्था का वातावरण लगातार बना हुआ है। अखंड हरिकीर्तन के बीच शाम 6 बजे मंदिर परिसर में भव्य महाआरती का आयोजन होगा। महाआरती के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। दीपों की रोशनी, आरती की ध्वनि और हरिनाम संकीर्तन के बीच मंदिर परिसर का माहौल और भी आध्यात्मिक होने की उम्मीद है। 24 घंटे तक चलने वाला अखंड हरिकीर्तन मंगलवार, 8 सितंबर 2026 को विधिवत संपन्न होगा। हरिकीर्तन के समापन के बाद मंदिर परिसर में भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण होगा। श्री श्री प्राचीन देवी मंदिर में होने वाला यह अखंड हरिकीर्तन केवल मंदिर परिसर तक सीमित नहीं है, बल्कि वर्षों से चली आ रही आस्था और परंपरा से लोगों को जोड़ने वाला अवसर भी है। 24 घंटे तक लगातार गूंजता हरिनाम, झाल-मंजीरों की ध्वनि और भगवान के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था ने ईस्ट गोला रोड के इस प्राचीन मंदिर को भक्ति और आध्यात्मिकता के केंद्र में बदल दिया है।

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