आम्रपाली परियोजना में परिवहन व्यवस्था पर सवाल, विभागीय सर्वे के बाद कार्रवाई की मांग तेज
टंडवा (चतरा)। आम्रपाली कोल परियोजना क्षेत्र में खनिज एवं कोयले की कथित ओवरलोड ढुलाई को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। झारखंड सरकार के खान एवं भू-विज्ञान विभाग के फाइल संख्या 129/2026, 2153 एम, दिनांक 19 अगस्त 2026 से संबंधित तीन दिवसीय सर्वे के आंकड़ों का हवाला देते हुए राज्य में खनिज परिवहन की व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
बताया गया है कि विभागीय स्तर पर तैयार विश्लेषणात्मक आंकड़ों के आधार पर परिवहन सचिव को पत्र भेजकर विभिन्न बिंदुओं पर समुचित एवं ठोस कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। महज तीन दिनों के सर्वे के आंकड़ों में सामने आई कथित अनियमितताओं ने खनिज परिवहन की निगरानी व्यवस्था पर चर्चा तेज कर दी है।
आम्रपाली परियोजना में ओवरलोडिंग का आरोप
स्थानीय स्तर पर आरोप लगाया जा रहा है कि सीसीएल की आम्रपाली परियोजना से शिवपुर रेलवे साइडिंग तक कोयले की ढुलाई में निर्धारित क्षमता से अधिक भार वाले वाहनों का परिचालन किया जा रहा है। परिवहन कार्य से जुड़ी एवीएस और वेरिएंट नामक कंपनियों को लेकर भी ओवरलोडिंग के आरोप लगाए जा रहे हैं।
हालांकि, इन कंपनियों के विरुद्ध ओवरलोडिंग अथवा किसी अवैध गतिविधि में संलिप्तता का अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच अथवा संबंधित विभाग की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। कंपनियों का पक्ष भी इस मामले में सामने आना बाकी है।
अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल
ओवरलोडिंग के आरोपों के बीच खनन एवं परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि लंबे समय से निर्धारित क्षमता से अधिक भार लेकर वाहनों के परिचालन की शिकायतें सामने आती रही हैं, तो नियमित जांच और कार्रवाई क्यों नहीं हुई। वहीं, अधिकारियों पर किसी प्रकार की मिलीभगत या आर्थिक लाभ लेने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही सामने आ सकती है।
उग्रवाद से जुड़े पुराने मामलों का भी संदर्भ
आम्रपाली परियोजना क्षेत्र पूर्व में उग्रवादी गतिविधियों और कथित टेरर फंडिंग से जुड़े मामलों को लेकर केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई के कारण चर्चा में रहा है। इसी पृष्ठभूमि में स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि खनिज परिवहन से जुड़ी किसी भी अवैध आर्थिक गतिविधि की संभावना की निष्पक्ष जांच क्यों न की जाए।
बताया गया है कि 18 अगस्त को एनआईए की विशेष अदालत से जुड़े एक मामले में टीपीसी के कुछ आरोपियों को सजा सुनाए जाने के बाद क्षेत्र में उग्रवाद से जुड़े पुराने मामलों की चर्चा फिर तेज हुई है। हालांकि, वर्तमान में ओवरलोड कोयला परिवहन और किसी उग्रवादी संगठन के बीच प्रत्यक्ष आर्थिक संबंध की पुष्टि बिना आधिकारिक जांच के नहीं की जा सकती।
कार्रवाई से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
अब निगाहें संबंधित विभागों की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि विभागीय सर्वे में ओवरलोडिंग अथवा अन्य परिवहन अनियमितताओं की पुष्टि हुई है, तो नियमों के तहत जिम्मेदार वाहन मालिकों, परिवहन एजेंसियों अथवा अन्य संबंधित पक्षों के विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।
स्थानीय लोगों की मांग है कि विभाग केवल सर्वे और रिपोर्ट तक सीमित न रहे, बल्कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर पारदर्शी और प्रभावी कार्रवाई करे। इससे सरकारी राजस्व को संभावित नुकसान रोकने के साथ-साथ खनिज एवं कोयला परिवहन व्यवस्था में नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।
अब सवाल यही है कि विभागीय आंकड़ों और शिकायतों के बाद जिम्मेदार अधिकारी ओवरलोडिंग पर कितनी गंभीरता से कार्रवाई करते हैं। कार्रवाई के वास्तविक परिणाम ही इन तमाम आरोपों और सवालों का ठोस जवाब दे सकेंगे।
























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