ढाई किमी सड़क के लिए करीब 2.94 करोड़ की योजना, दो साल बाद भी निर्माण शुरू नहीं; ग्रामीणों में नाराजगी
टंडवा (चतरा)। आजादी के बाद से पक्की सड़क की सुविधा का इंतजार कर रहे टंडवा थाना क्षेत्र अंतर्गत सुईयाटांड़ गांव के करीब 200 आदिवासी परिवारों की उम्मीदें टेंडर निकलने के बावजूद पूरी नहीं हो सकी हैं। ग्रामीण कार्य विभाग की ओर से सड़क निर्माण की योजना तैयार होने और निविदा प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
जानकारी के अनुसार, राहम-बड़गांव पथ से गोन्दा स्कूल होते हुए सुईयाटांड़ तक करीब 2.5 किलोमीटर सड़क निर्माण की योजना बनाई गई थी। निविदा में योजना की अनुमानित लागत 2 करोड़ 94 लाख 4 हजार 300 रुपये निर्धारित की गई थी। निविदा खोलने की तिथि 24 अगस्त 2024 निर्धारित थी, जबकि कार्य पूरा करने की अवधि 15 माह तय की गई थी। इसके बावजूद सड़क निर्माण अब तक धरातल पर शुरू नहीं हो सका है।
नापी और प्रशासनिक स्वीकृति के बाद भी काम लंबित
ग्रामीणों के अनुसार, सड़क निर्माण को लेकर जिला प्रशासन की ओर से स्थल की नापी कराई गई थी। इसके बाद प्रशासनिक स्वीकृति मिलने और निविदा जारी होने से ग्रामीणों को उम्मीद जगी थी कि जल्द ही गांव तक सड़क पहुंच जाएगी। लेकिन लंबे समय बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं होने से ग्रामीणों की उम्मीद निराशा में बदल रही है।
सुईयाटांड़ में करीब 200 आदिवासी परिवार रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण उन्हें रोजमर्रा के आवागमन में भारी परेशानी होती है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है। इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने, बच्चों को स्कूल भेजने, बाजार जाने और अन्य जरूरी कार्यों के लिए ग्रामीणों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
जिला परिषद सदस्य ने उठाए सवाल
जिला परिषद सदस्य सुभाष यादव ने सड़क निर्माण में हो रही देरी को लेकर ग्रामीण कार्य विभाग पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि जब स्थल की नापी हो चुकी थी, प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी थी और टेंडर भी हो चुका था, तो इसके बाद निर्माण कार्य शुरू क्यों नहीं हुआ, इसका जवाब विभाग को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि टेंडर प्रक्रिया के बाद भी सड़क निर्माण का काम लंबे समय से लंबित रहना गंभीर विषय है। उन्होंने संबंधित विभाग से अविलंब निर्माण कार्य शुरू कराने और देरी के लिए जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
ग्रामीणों की नजर अब निर्माण कार्य पर
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क का निर्माण उनके लिए केवल विकास योजना नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आवागमन से जुड़ी बुनियादी जरूरत है। उनका कहना है कि वर्षों से सड़क की प्रतीक्षा के बाद टेंडर निकलने से उम्मीद जगी थी, लेकिन निर्माण शुरू नहीं होने से वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि करीब 2.94 करोड़ रुपये की स्वीकृत योजना के तहत लंबित सड़क निर्माण आखिर कब धरातल पर उतरता है। संबंधित विभाग की ओर से निर्माण में देरी के कारणों और आगे की कार्ययोजना स्पष्ट किए जाने की भी ग्रामीण अपेक्षा कर रहे हैं।























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