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दीपक तले अंधेरा: राजनीतिक गढ़ में महीनों से लो-वोल्टेज और आँख मिचौली की मार, जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल

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मयूरहंड(चतरा)मयूरहंड प्रखंड में बिजली व्यवस्था को लेकर एक अजीब विडंबना सामने आ रही है। चोरकारी पावरग्रिड हो या एकतारा सब-स्टेशन, यहां से जिले के दूसरे इलाकों में बिजली की आपूर्ति की जाती है। लेकिन इन्हीं विद्युत केंद्रों के नजदीक मयूरहंड की करमा और मंझगांवा पंचायत के ग्रामीण कई महीनों से लो-वोल्टेज और बिजली की आँख मिचौली की समस्या झेलने को मजबूर हैं। करमा और मंझगांवा पंचायत को क्षेत्र का राजनीतिक रूप से वर्तमान में प्रभावशाली इलाका माना जाता है। इन पंचायतों के गांवों से विभिन्न राजनीतिक दलों—भाजपा, झामुमो, आजसू और जेएलकेएम—के प्रखंड अध्यक्ष पद पर आसीन हैं। इसके बावजूद ग्रामीणों की बिजली समस्या का स्थायी समाधान नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का कहना है की बिजली की आँख मिचौली के कारण घरेलू उपकरण ठीक से काम नहीं करते और रोजमर्रा के कामकाज के साथ-साथ विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। कई महीनों से समस्या बनी रहने के बावजूद अब तक इसका ठोस समाधान नहीं हो सका है।
“घर का जोगी जोगना, आन गाँव का सिद्ध” वाली स्थिति यहां देखने को मिल रही है। स्थानीय लोगो का कहना है कि एकतारा से दोनों पंचायत के लिए अलग से इग्यारह हजार की तार आने के वावजुद विभाग के जेई,एसडीओ रोजाना आज कल करते आ रहे है। इन नेताओं और जनप्रतिनिधियों को जनता की समस्या को प्राथमिकता देते हुए विद्युत विभाग के अधिकारियों से समन्वय कर समस्या का स्थायी समाधान कराना चाहिए। करमा और मंझगांवा की स्थिति आज यही सवाल पूछ रही है—जब बिजली की आपूर्ति के लिए बड़े-बड़े विद्युत केंद्र मौजूद हैं, तो उन्हीं के इलाके की जनता अंधेरे और लो-वोल्टेज में क्यों जीने को मजबूर है?
सच ही कहा गया है—“दीपक तले अंधेरा।”

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