एनटीपीसी-सीसीएल की अलग ट्रांसपोर्टिंग सड़क की मांग तेज, हादसों और धूल-धुएं से ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश
टंडवा/चतरा। चतरा जिले के टंडवा में एनटीपीसी और सीसीएल परियोजनाओं से जुड़े भारी वाहनों का लंबे समय से ग्रामीण सड़कों पर परिचालन स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बनता जा रहा है। घनी आबादी वाले इलाकों से लगातार भारी वाहनों की आवाजाही के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित होने के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है। इसे लेकर अब ग्रामीणों में नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़ी परियोजनाओं के संचालन से पहले अलग परिवहन सड़क की व्यवस्था की जानी चाहिए थी, ताकि ग्रामीण आबादी के बीच से भारी वाहनों का परिचालन नहीं करना पड़े। वर्षों से इस समस्या का सामना कर रहे ग्रामीण अब परियोजना प्रबंधन से स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
भारी वाहनों से बढ़ी परेशानी
ग्रामीण सड़कों पर कोयला और अन्य सामग्री की ढुलाई करने वाले भारी वाहनों के कारण सड़क पर धूल, जाम और दुर्घटना का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों के अनुसार, पैदल चलने वाले लोगों, दोपहिया वाहन चालकों, किसानों और छोटे कारोबारियों को सबसे अधिक परेशानी होती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि परियोजनाओं से जुड़े अधिकारी और बड़े कारोबारी अपेक्षाकृत सुरक्षित व्यवस्था में रहते हैं, जबकि ग्रामीणों को रोजमर्रा के आवागमन के दौरान धूल और भारी वाहनों के बीच से गुजरना पड़ता है।
प्रदूषण को लेकर भी चिंता
पावर प्लांट और कोयला परियोजनाओं से जुड़े प्रदूषण को लेकर भी ग्रामीणों में चिंता है। लोगों का कहना है कि भारी वाहनों से उड़ने वाली धूल और परियोजना क्षेत्र से निकलने वाले धुएं का असर लंबे समय तक आसपास रहने वाली आबादी पर पड़ सकता है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब परियोजनाओं से जुड़े बड़े स्तर के संसाधन उपलब्ध हैं, तो आम लोगों की सुरक्षा और सुविधा के लिए अलग परिवहन मार्ग विकसित करने की दिशा में ठोस पहल क्यों नहीं की जा रही है।
अब स्थायी समाधान चाहते हैं ग्रामीण
स्थानीय लोगों का कहना है कि परियोजनाओं के लिए जमीन देने वाले ग्रामीणों को ही यदि सुरक्षित आवागमन और बेहतर जीवन की सुविधा नहीं मिलती है तो विकास का लाभ अधूरा रह जाएगा। ग्रामीण अब भारी वाहनों के लिए अलग ट्रांसपोर्टिंग सड़क बनाने, यातायात व्यवस्था सुधारने और प्रदूषण से बचाव के प्रभावी उपाय करने की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि समस्या का समाधान समय रहते नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में ग्रामीणों का विरोध और व्यापक हो सकता है।






















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