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तुलसी सप्ताह में रामकथा के विविध आयामों पर मंथन

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गणित से मनोविज्ञान तक रामकथा की गहराई पर विद्वानों ने रखे विचार, समकालीन जीवन में तुलसी साहित्य की उपयोगिता पर जोर

हजारीबाग। विनोबा भावे विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में आयोजित तुलसी सप्ताह व्याख्यानमाला के तीसरे दिन शनिवार को रामकथा के विविध आयामों पर विद्वतापूर्ण व्याख्यान हुआ। कार्यक्रम में रामगढ़ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. बिमल कुमार मिश्र और मारखम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के प्राचार्य डॉ. गजेन्द्र सिंह मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए।

डॉ. बिमल कुमार मिश्र ने रामकथा के गणितीय पक्ष पर चर्चा करते हुए कहा कि रामकथा को केवल धार्मिक अथवा साहित्यिक आख्यान तक सीमित नहीं किया जा सकता। इसमें जीवन, समाज और मानवीय व्यवहार से जुड़ी अनेक गणितीय संरचनाएं भी दिखाई देती हैं। उन्होंने वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास की रचनाओं में गणना, अनुपात, क्रम, संरचना तथा कथा-विन्यास के विभिन्न पक्षों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

स्त्री पात्रों के जरिए समझाया नारी मनोविज्ञान

डॉ. गजेन्द्र सिंह ने रामचरितमानस के प्रमुख स्त्री पात्रों के माध्यम से तुलसीदास की मनोवैज्ञानिक दृष्टि को सामने रखा। उन्होंने सीता, कैकेयी, उर्मिला और मंथरा जैसे पात्रों के चरित्र एवं मनोभावों का विश्लेषण करते हुए कहा कि तुलसीदास ने स्त्री मन की संवेदनाओं, अंतर्द्वंद्वों और जटिलताओं को बेहद सूक्ष्मता से चित्रित किया है। उन्होंने कहा कि तुलसी के स्त्री पात्र एक ही भाव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनमें विविध मानवीय मनोभाव और परिस्थितियों के अनुरूप बदलते अंतर्द्वंद्व दिखाई देते हैं।

राम के चरित्र से कर्तव्य और मर्यादा की सीख

इससे पहले संत कोलंबा महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. भुवनेश्वर महतो ने कहा कि राम का चरित्र माता-पिता और गुरु के प्रति सम्मान, मर्यादा और कर्तव्यबोध की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि रामकथा में जीवन को बेहतर बनाने के अनेक सूत्र मौजूद हैं, जिन्हें वर्तमान समय में भी अपनाया जा सकता है। इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. अरुण कुमार मिश्रा ने तुलसी की रामकथा की वर्तमान प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों से राम के जीवन से अनुशासन, त्याग और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना ग्रहण करने का आह्वान किया।

तुलसी साहित्य की समकालीन प्रासंगिकता पर जोर

कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. सुबोध सिंह ‘शिवगीत’ ने की। उन्होंने तुलसी साहित्य की व्यापकता और वर्तमान समय में उसकी उपयोगिता पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में हिंदी विभाग के डॉ. केदार सिंह, डॉ. सुनील दुबे, डॉ. राजू राम, राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. सुकल्याण मोइत्रा सहित विभाग के विद्यार्थी और शोधार्थी उपस्थित रहे।

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