समाजसेवी राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने खनन विभाग और जिला प्रशासन को चेताया, बोले- कॉलेज व स्कूल के पास खुले गड्ढे बन सकते हैं बड़े हादसे का कारण
गुमला, झारखंड। देश की आजादी की 80वीं वर्षगांठ के मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता और गुमला को जिला घोषित कराने के आंदोलन से जुड़े रहे राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने गुमला समाहरणालय से करीब पांच किलोमीटर दूर करमडीपा-कसनी-बम्हनी पंचायत क्षेत्र में स्थित पत्थर उत्खनन स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने खनन के बाद छोड़ी गई गहरी खाई और उसमें जमा पानी को लेकर जिला प्रशासन, खनन विभाग और सरकार का ध्यान आकर्षित कराया।
राजेंद्र प्रसाद गुप्ता के अनुसार, करीब दो से तीन एकड़ क्षेत्र में पत्थर उत्खनन के बाद कई जगह बेहद गहरी खाइयां बन गई हैं। इनमें बारिश का पानी जमा होने से स्थिति और अधिक खतरनाक हो गई है। उनका कहना है कि खुले गड्ढों के आसपास सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने से कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है।
स्कूली बच्चों और पशुओं के लिए बताया गंभीर खतरा
उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र कॉलेज के नजदीक है और आसपास युवाओं की आवाजाही भी होती है। जानकारी के अनुसार, कुछ युवा और स्कूली बच्चे भी अनजाने में इस इलाके में पहुंच जाते हैं। ऐसे में गहरी खाई और पानी से भरे गड्ढे किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि चरने के दौरान पशु भी इन गड्ढों के आसपास पहुंच सकते हैं, जिससे उनके गिरने की आशंका बनी रहती है।
‘हादसा होने से पहले प्रशासन करे कार्रवाई’
राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने जिला प्रशासन और खनन विभाग से मांग की कि संबंधित स्थल का तत्काल निरीक्षण कराया जाए और खनन के बाद छोड़े गए खतरनाक गड्ढों को नियमानुसार सुरक्षित अथवा भरने की कार्रवाई की जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि खुले गड्ढे में किसी व्यक्ति या बच्चे की जान चली जाती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी—जिला प्रशासन, खनन विभाग, लीजधारक या सरकार की? उन्होंने कहा कि किसी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय प्रशासन को अभी से ठोस कदम उठाने चाहिए।
ग्रामीणों के साथ आगे की रणनीति बनाने की चेतावनी
समाजसेवी ने कहा कि यदि जिला प्रशासन इस मामले में जल्द कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं करता है, तो ग्रामीणों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। उनका कहना है कि खनन क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि किसी संभावित हादसे को समय रहते रोका जा सके।





















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