रहस्यमयी टूटी झरना मंदिर: 100 वर्षों से अनवरत बह रही जलधारा, आस्था और विज्ञान दोनों हैं हैरान
रामगढ़। झारखंड के रामगढ़ जिले के मध्य स्थित बोंगाबर का टूटी झरना मंदिर भगवान शिव की अनन्य भक्ति, रहस्य और आस्था का अद्भुत संगम है। यह प्राचीन मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि ऐसा आध्यात्मिक केंद्र है, जहां वर्षों से बह रही रहस्यमयी जलधारा आज भी श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं के लिए कौतूहल का विषय बनी हुई है।
रांची से लगभग 50 किलोमीटर और हजारीबाग से करीब 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर शांत ग्रामीण परिवेश में अवस्थित है। पक्की सड़क से होकर श्रद्धालु मंदिर तक पहुंचते हैं, जहां प्रवेश करते ही उन्हें अद्भुत आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव होता है।
मां गंगा की प्रतिमा से निरंतर बहता है जल
मंदिर के गर्भगृह में स्थापित देवी गंगा की प्रतिमा से लगातार जलधारा प्रवाहित होती रहती है, जो सीधे भगवान शिव के शिवलिंग पर गिरती है। ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं मां गंगा अनवरत भगवान शिव का जलाभिषेक कर रही हों। सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि यह जलधारा दशकों से कभी नहीं रुकी।
रेलवे निर्माण के दौरान हुई थी मंदिर की खोज
मंदिर के पुजारी शैलेश कुमार ओझा के अनुसार वर्ष 1925 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान रेलवे लाइन निर्माण के समय खुदाई में यह भूमिगत गर्भगृह मिला था। गर्भगृह में भगवान शिव और देवी गंगा की प्रतिमाएं स्थापित थीं। मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया और तभी से यह रहस्यमयी जलधारा लगातार बह रही है।
रहस्य बना हुआ है जल का स्रोत
मंदिर के आसपास एक नदी बहती है, लेकिन गर्भगृह में बहने वाले जल का वास्तविक स्रोत आज तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। कुछ विशेषज्ञ इसे भूमिगत दबाव (आर्टेसियन स्रोत) का परिणाम मानते हैं, जबकि श्रद्धालु इसे भगवान शिव और मां गंगा का दिव्य चमत्कार मानते हैं। आस्था और विज्ञान दोनों इस रहस्य के सामने अपने-अपने दृष्टिकोण के साथ मौजूद हैं।
स्वचालित हैंडपंप भी हैं आकर्षण का केंद्र
मंदिर परिसर के समीप ऐसे हैंडपंप भी हैं, जिनसे लगातार पानी निकलता रहता है। गांव के बच्चे इन्हीं जलधाराओं के बीच खेलते और स्नान करते नजर आते हैं, जो इस स्थान की विशेष पहचान बन चुकी है।
न्यूज स्केल टीम ने किया स्थल का अवलोकन
न्यूज़ स्केल की टीम जब शाम लगभग चार बजे मंदिर पहुंची, तब मंदिर के मुख्य द्वार बंद थे। कुछ देर बाद गांव के पुजारी पहुंचे और टीम को भूमिगत गर्भगृह तक ले गए। जमीन से लगभग पांच फीट नीचे सीढ़ियां उतरकर गर्भगृह में प्रवेश करना अपने आप में एक अनूठा अनुभव था।
मंद प्रकाश के बीच भगवान शिव के शिवलिंग पर गिरती जलधारा, गर्भगृह की अद्भुत शांति और आध्यात्मिक वातावरण ने पूरे परिसर को अलौकिक बना दिया। ऐसा महसूस होता है मानो यहां समय ठहर गया हो और केवल आस्था का प्रवाह शेष हो।
आस्था और प्रकृति का अनोखा संगम
टूटी झरना मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि प्रकृति और रहस्य का भी अद्भुत उदाहरण है। यहां आने वाला हर श्रद्धालु और पर्यटक इस रहस्यमयी जलधारा को देखकर आश्चर्यचकित रह जाता है। यही कारण है कि यह मंदिर झारखंड के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान रखता है।
ग्राउंड रिपोर्ट: तुलसी यादव एवं रितीक गौतम तिवारी
न्यूज स्केल लाइव | भरोसे की पहचान


























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