*सरस्वती शिशु विद्या मंदिर बड़की चाँपी का 31वां वार्षिकोत्सव मनाया गया*
*बुजुर्गों का आशीर्वाद ही सबसे बड़ी पूंजी, 7 बच्चों से शुरू हुआ विद्यालय आज बना वटवृक्ष: धनंजय प्रसाद*
*बड़की चाँपी:* सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, बड़की चाँपी का 31वां स्थापना दिवस एवं दादा-दादी, नाना-नानी सम्मान समारोह रविवार (12 जुलाई 2026) को विद्यालय प्रांगण में बेहद उत्साहमय और भावुक वातावरण में संपन्न हुआ। भारतीय संस्कृति और आधुनिक शिक्षा के इस संगम में जहां एक ओर बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, वहीं दूसरी ओर घर के बुजुर्गों को ‘देवतुल्य’ सम्मान देकर नई मिसाल पेश की। कार्यक्रम का भव्य उद्घाटन विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के संरक्षक धनंजय प्रसाद, सचिव यदुनंदन तिवारी, कोषाध्यक्ष राजेश कुमार, उपाध्यक्ष अनुपदेव पौराणिक, उपस्थित अभिभावकवृंद, मातृशक्ति एवं प्रधानाचार्य मनोहर मोदी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। अतिथियों ने भारत माता, ॐ और मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर, पुष्पार्चन किया और भारत माता की आरती उतारी। इसके बाद प्रधानाचार्य मनोहर मोदी ने सभी अतिथियों का परिचय कराया और उन्हें अंग वस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया।
समारोह का सबसे भावुक और मुख्य आकर्षण दादा-दादी, नाना-नानी सम्मान समारोह रहा। विद्यालय के भैया-बहनों ने दीपों से सजी थाल लेकर अपने देवतुल्य दादा-दादी और नाना-नानी को तिलक लगाया, उनकी आरती उतारी और चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा: “दुनिया की सबसे कीमती चीज किसी तिजोरी में नहीं, बल्कि हमारे बुजुर्गों के आशीर्वाद में होती है। जिस घर में बुजुर्गों का सम्मान होता है, उस घर में खुशियां हमेशा मुस्कुराती हैं।” विद्यालय के विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कक्षा 9वीं की छात्रा तनु कुमारी ने विद्यालय के गौरवशाली इतिहास का वर्णन किया। इसके बाद प्रधानाचार्य ने विद्यालय का वृत्त कथन (वार्षिक रिपोर्ट) प्रस्तुत करते हुए स्कूल की रूपरेखा और उपलब्धियों को सबके सामने रखा।
संरक्षक धनंजय प्रसाद ने भावुक होते हुए कहा कि जिस विद्यालय की नींव 12 जुलाई 1995 को मात्र 7 भैया-बहनों के साथ रखी गई थी, आज वह 660 विद्यार्थियों के साथ एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुका है। उन्होंने इस सफलता के लिए प्रधानाचार्य और आचार्यों की कड़ी मेहनत व कर्मठता की सराहना की। विद्यालय के सचिव यदुनंदन तिवारी ने सभी को 31वें स्थापना दिवस की बधाई देते हुए छात्रों को अनुशासन का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि भैया-बहनों के जीवन में अनुशासनशीलता बेहद आवश्यक है। यह हमें संयमित, संगठित और नियमित बनाता है, जो आगे चलकर हमारी सफलता में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस ऐतिहासिक अवसर पर विद्यालय के भैया-बहनों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक नृत्य एवं संगीत की प्रस्तुतियां दी गईं। साथ ही छात्रों द्वारा मंचित एक लघु नाटक ने उपस्थित सभी लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन विद्यालय के उपाध्यक्ष अनुपदेव पौराणिक ने किया, जबकि मंच का सफल संचालन आचार्य नरेश साहू द्वारा किया गया। कार्यक्रम का समापन पारंपरिक ‘कल्याण मंत्र’ के साथ हुआ। इस गौरवमयी क्षण के साक्षी बनने के लिए स्थानीय पत्रकार नंदलाल तिवारी, भूपाल पाठक, मनोहर साहू, शुभम मित्तल सहित अभिभावक वृंद, आचार्य-दीदी और भैया-बहन उपस्थित रहे।
























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