*सर्पदंश से बचाव ही सबसे बड़ा उपाय, सतर्कता बरतें एवं समय पर उपचार कराएं*
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*बारिश के मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जिला प्रशासन की अपील*
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*लोहरदगा।*
मानसून ऋतु के दौरान जून से सितंबर माह में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। सर्पदंश से लोगों की मौत का मुख्य कारण इलाज में देरी और जागरूकता की कमी है। ऐसे में जिला प्रशासन लोहरदगा द्वारा आमजनों से सतर्कता बरतने एवं सर्पदंश से बचाव के उपाय अपनाने की अपील की जाती है:-
• रात के समय घर से बाहर निकलते समय टॉर्च या पर्याप्त रोशनी का उपयोग करें।
• खेतों, झाड़ियों एवं लकड़ी या भूसे के ढेर के पास कार्य करते समय जूते एवं पूरे शरीर को ढंकने वाले कपड़े पहनें।
• घर एवं उसके आसपास साफ-सफाई बनाए रखें तथा चूहों की संख्या नियंत्रित रखें, क्योंकि चूहे सांपों को आकर्षित करते हैं।
• फर्श पर सोने से बचें तथा संभव हो तो ऊंचे बिस्तर का उपयोग करें।
• बच्चों को झाड़ियों, पत्थरों के ढेर एवं सुनसान स्थानों में खेलने से रोकें।
घर के आसपास झाड़ियों एवं घास की नियमित सफाई कराएं।
*सर्प-दंश से बचाव हेतु क्या करें एवं क्या ना करें*
*✅ DO’S (क्या करें)*
1. जहाँ साँप ने काटा है वहाँ तेज धारा से पानी मारें ताकि विष निकल जाए। पीड़ित को ज्यादा से ज्यादा पानी पिलाने का प्रयास करें। जितने से.मी. (सेंटीमीटर) पीड़ित को रहेगा उतनी ही तेजी से फूलेगा।
2. यदि हाथ पर साँप ने काटा है तो हाथ को मोड़ें एवं प्रेशर जैसा हल्का कर रखें। रोगी का बाहरी पैर मोड़ते हुए बायीं ओर करवट कर लिटाएं।
3. प्रयास होना चाहिए कि सर्पदंश से पीड़ित को ऐसे वाहन में अस्पताल जल्द से जल्द ले जाया जाए जिसमें पीड़ित को झटका नहीं लगे। उसे आश्वस्त करें कि दवा लेने से वह ठीक हो जाएगा।
4. सर्पदंश से पीड़ित को उपचार हेतु अपने नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ले जाएँ। एंटी स्नेक वेनम इंजेक्शन (दवाई) सभी अस्पतालों एवं स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध है।
*❌ DON’TS (क्या ना करें)*
1. साँप के दंश वाली जगह पर किसी भी तरह से काटना, चूसना या दबाना बिल्कुल न करें।
2. किसी भी स्थिति में टॉर्निकेट (रस्सी आदि) नहीं बाँधें। इससे ज़हर अधिक फैल सकता है। ज़हर खून चूसने से नहीं निकलता।
3. अक्सर साँप काटने से लोग घबरा जाते हैं। घबराएँ नहीं, क्योंकि घबराहट की वजह से हृदय गति बढ़ने से ज़हर तेजी से फैल सकता है।
4. पीड़ित को सोने नहीं दें तथा खड़ा होकर भी न रहने दें।
5. साँप के काटने पर एक बार झाड़-फूँक कराने वाले के पास जाने से पहले, सीधे अस्पताल जाएँ। देरी से ज़हर शरीर में फैल जाता है, जिससे जान जाने का खतरा बढ़ जाता है।
*सर्पदंश एक चिकित्सकीय आपात स्थिति है, जिसका उपचार केवल स्वास्थ्य संस्थानों में ही संभव है। इसलिए किसी भी प्रकार की घटना होने पर तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र अथवा अस्पताल से संपर्क करें तथा समय पर उपचार प्राप्त करें।*


































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