शहीद सीआरपीएफ जवान की मौत के बाद ग्रामीणों का आंदोलन तेज, सड़क सुरक्षा और स्थायी मुआवजा नीति की मांग
सिमरिया (चतरा)। सिमरिया-चतरा मुख्य मार्ग (एनएच-522) पर कोल ट्रांसपोर्टिंग वाहनों की चपेट में आकर लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं और लोगों की मौत के विरोध में शनिवार से बिराजपुर गांव के समीप आमरण अनशन शुरू हो गया। झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के केंद्रीय सदस्य सह विधानसभा प्रत्याशी मनोज कुमार चंद्रा मृतकों के परिजनों एवं ग्रामीणों के साथ अनशन पर बैठ गए हैं। उन्होंने अनुमंडल पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए कहा है कि जब तक जिला प्रशासन सड़क सुरक्षा, दुर्घटना पीड़ितों के लिए स्पष्ट मुआवजा नीति तथा कोयला परिवहन की स्थायी कार्ययोजना तय नहीं करता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
अनशनकारियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में सिमरिया-चतरा मार्ग पर कई सड़क हादसे हो चुके हैं। इसी क्रम में 9 जुलाई को बिराजपुर निवासी 23 वर्षीय सीआरपीएफ जवान लक्ष्मण कुमार यादव की तेज रफ्तार कोल लदे हाईवा की चपेट में आने से मौत हो गई थी। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है और इसी कारण शहीद जवान के गांव बिराजपुर को आंदोलन का केंद्र बनाया गया है।
जेएमएम नेता मनोज कुमार चंद्रा ने आरोप लगाया कि वर्षों से इस मार्ग पर कोयला ढुलाई के कारण लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा अब तक कोई प्रभावी रोड मैप या सुरक्षा व्यवस्था लागू नहीं की गई। उन्होंने मांग की कि हजारीबाग के केरेडारी क्षेत्र से होने वाली कोयला ढुलाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए तथा दुर्घटना में जान गंवाने वाले परिवारों के लिए समान एवं स्थायी मुआवजा नीति बनाई जाए।
ग्रामीणों का आरोप है कि कोयला परिवहन से विकास का लाभ दूसरे जिले को मिलता है, जबकि सड़क दुर्घटनाओं का खामियाजा चतरा जिले के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दुर्घटनाओं के बाद मुआवजा देने में भी दोहरी नीति अपनाई जाती है।
24 घंटे बाद सैनिक सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार, गार्ड ऑफ ऑनर देकर दी गई अंतिम विदाई
शहीद सीआरपीएफ जवान लक्ष्मण कुमार यादव का शुक्रवार को स्थानीय नदी घाट पर पूरे सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। छत्तीसगढ़ से पहुंची सीआरपीएफ की बटालियन ने अपने साथी को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी। इस दौरान पूरा क्षेत्र “लक्ष्मण यादव अमर रहें” के नारों से गूंज उठा।
गौरतलब है कि गुरुवार को देल्हो घाटी में एक अनियंत्रित कोल लदे हाईवा की टक्कर से लक्ष्मण यादव गंभीर रूप से घायल हो गए थे। हजारीबाग सदर अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उनकी मौत हो गई। घटना के बाद ग्रामीणों और परिजनों ने कोल वाहनों के परिचालन पर रोक तथा उचित मुआवजे की मांग को लेकर एनएच-522 पर करीब 24 घंटे तक सड़क जाम रखा।
बाद में प्रशासनिक अधिकारियों के आश्वासन के बाद जाम आंशिक रूप से समाप्त कराया गया और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हुई। अंतिम यात्रा और दाह संस्कार में बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि तथा सीआरपीएफ के जवान शामिल हुए और दिवंगत जवान को श्रद्धांजलि अर्पित की।























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